नई दिल्ली. भारतीय वायुसेना ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे दक्षिणी क्षेत्र में 7 से 10 जुलाई 2026 तक एक महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास आयोजित करने की तैयारी पूरी कर ली है। इस संबंध में आवश्यक NOTAM जारी कर संबंधित वायुक्षेत्र को अस्थायी रूप से सैन्य गतिविधियों के लिए आरक्षित घोषित किया गया है। जारी अधिसूचना के अनुसार अभ्यास 7 जुलाई को प्रातः 04:00 UTC से प्रारंभ होकर 10 जुलाई को सायं 16:30 UTC तक संचालित होगा। इस अवधि में निर्धारित क्षेत्र में 28 हजार फीट तक का वायुक्षेत्र भारतीय वायुसेना के उपयोग के लिए सुरक्षित रहेगा। यह अभ्यास राजस्थान के बाड़मेर तथा गुजरात के अहमदाबाद-राजकोट क्षेत्र के निकट, पाकिस्तान के रहीम यार खान से सटे दक्षिणी सीमावर्ती इलाके में आयोजित किया जाएगा।
नागरिक उड़ानों के मार्गों में हो सकता है अस्थायी परिवर्तन
वायुक्षेत्र के आरक्षण के कारण नागरिक विमानन सेवाओं पर सीमित और अस्थायी प्रभाव पड़ सकता है। विमानन अधिकारियों के अनुसार संबंधित हवाई मार्गों का उपयोग करने वाली कुछ उड़ानों के मार्ग अथवा समय में परिचालन संबंधी बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि सैन्य और नागरिक विमानों के संचालन के बीच पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। नागरिक उड्डयन क्षेत्र में ऐसे परिवर्तन पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार किए जाते हैं और एयरलाइनों को पहले से आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध करा दी जाती हैं। यात्रियों की सुरक्षा और उड़ानों के निर्बाध संचालन को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग किया जाता है, जिससे सामान्य विमानन गतिविधियां न्यूनतम प्रभावित हों।
NOTAM क्या है और क्यों होता है जारी?
NOTAM अर्थात Notice to Air Missions एक अंतरराष्ट्रीय विमानन सूचना प्रणाली है, जिसके माध्यम से पायलटों, एयर ट्रैफिक कंट्रोल एजेंसियों और विमानन कंपनियों को किसी विशेष क्षेत्र में होने वाली अस्थायी गतिविधियों, प्रतिबंधों या संभावित जोखिमों की पूर्व सूचना दी जाती है। सैन्य अभ्यास, मिसाइल परीक्षण, हवाई प्रदर्शन, निर्माण कार्य या अन्य विशेष परिस्थितियों में NOTAM जारी करना अंतरराष्ट्रीय नागरिक विमानन मानकों का सामान्य हिस्सा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सैन्य और नागरिक विमानों के बीच पर्याप्त दूरी बनी रहे तथा किसी भी प्रकार की सुरक्षा संबंधी चुनौती उत्पन्न न हो। भारतीय वायुसेना भी बड़े स्तर के प्रशिक्षण और सामरिक अभ्यासों के दौरान नियमित रूप से इस प्रक्रिया का पालन करती है।
यथार्थ परिस्थितियों में प्रशिक्षण से बढ़ती है वायुसेना की परिचालन क्षमता
आधुनिक युद्धक परिस्थितियों में वायुसेना की प्रभावशीलता केवल अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि नियमित प्रशिक्षण, समन्वित अभियान और वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप अभ्यास भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के बड़े अभ्यासों में लड़ाकू विमान, परिवहन विमान, हवाई निगरानी प्रणाली, संचार नेटवर्क, वायु रक्षा तंत्र और विभिन्न परिचालन इकाइयों के बीच तालमेल का परीक्षण किया जाता है। इससे पायलटों और ग्राउंड क्रू की परिचालन क्षमता में वृद्धि होती है तथा किसी भी आकस्मिक सुरक्षा चुनौती का त्वरित और प्रभावी ढंग से सामना करने की तैयारी मजबूत होती है। भारतीय वायुसेना समय-समय पर देश के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे अभ्यास आयोजित करती रही है, जिससे उसकी युद्धक तत्परता और समन्वय क्षमता निरंतर सुदृढ़ होती है।
सीमावर्ती सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं ऐसे अभ्यास
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि नियमित सैन्य अभ्यास किसी भी पेशेवर सशस्त्र बल की सामान्य प्रशिक्षण प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा होते हैं और इनका उद्देश्य परिचालन दक्षता बनाए रखना होता है। भारत की पश्चिमी सीमा सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है, इसलिए वायुसेना द्वारा समय-समय पर आयोजित ऐसे अभ्यास सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के अनुरूप NOTAM जारी कर नागरिक और सैन्य विमानन के बीच सुरक्षित समन्वय भी सुनिश्चित किया जाता है। आने वाले चार दिनों तक चलने वाला यह अभ्यास भारतीय वायुसेना की रणनीतिक तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रभावी हवाई संचालन की क्षमता को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।