नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण (CSAM) से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस गंभीर मामले में मेटा (Meta) को तलब कर विस्तृत जवाब मांगा जाए। सरकार यह जानना चाहती है कि ऐसे संवेदनशील और आपत्तिजनक विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर कैसे दिखाई दिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कंपनी ने क्या सुरक्षा व्यवस्था लागू की है।
विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
सरकार मेटा से केवल विज्ञापनों के संबंध में स्पष्टीकरण ही नहीं मांगेगी, बल्कि यह भी पूछेगी कि कंपनी की विज्ञापन समीक्षा (Ad Review) प्रणाली कैसे काम करती है। अधिकारियों का मानना है कि यदि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट वाले विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहे हैं, तो यह कंटेंट मॉडरेशन और विज्ञापन जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सरकार इस बात की भी जानकारी चाहती है कि ऐसे कंटेंट की पहचान करने और उसे तत्काल हटाने के लिए कौन-कौन से तकनीकी और मानवीय सुरक्षा उपाय अपनाए जा रहे हैं।
एक ही सप्ताह में दूसरी बार सरकार के निशाने पर Meta
यह लगातार दूसरा मौका है जब एक ही सप्ताह में केंद्र सरकार ने Meta को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। इससे पहले सरकार ने व्हाट्सएप के प्रस्तावित Username Feature पर भी कंपनी को नोटिस जारी किया था। सरकार ने आशंका जताई थी कि इस फीचर का दुरुपयोग कर साइबर अपराधी फर्जी पहचान बनाकर ऑनलाइन ठगी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर अपराधों को अंजाम दे सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि जब तक इस विषय पर संतोषजनक चर्चा पूरी नहीं होती, तब तक भारत में इस फीचर को लागू नहीं किया जाए।
यूजर सुरक्षा को लेकर सरकार की बढ़ी चिंता
सूत्रों के मुताबिक सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म केवल तकनीकी सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रह सकते। यदि किसी नए फीचर या विज्ञापन प्रणाली से यूजर्स, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा पर खतरा पैदा होता है, तो प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय की जाएगी। इसी कारण इंस्टाग्राम विज्ञापन मामले और व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर दोनों पर सरकार बेहद गंभीरता से निगरानी कर रही है।
आईटी नियमों का पालन करने की याद दिलाई
सरकार ने Meta को यह भी याद दिलाया है कि भारत में वह Significant Social Media Intermediary (SSMI) की श्रेणी में आता है। ऐसे में कंपनी पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और आईटी नियमों के तहत निर्धारित सभी Due Diligence दायित्वों का पालन करना अनिवार्य है। इसमें यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करना, आपत्तिजनक सामग्री पर त्वरित कार्रवाई करना और किसी भी संभावित दुरुपयोग को रोकना कंपनी की कानूनी जिम्मेदारी है।
सरकार किन सवालों के जवाब चाहती है?
सरकार Meta से यह स्पष्ट करने को कह सकती है कि इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण से जुड़े विज्ञापन कैसे प्रसारित हुए, उन्हें रोकने के लिए वर्तमान सुरक्षा तंत्र कितना प्रभावी है, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे और कंपनी की विज्ञापन स्वीकृति प्रक्रिया में किस प्रकार की निगरानी व्यवस्था लागू है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ेगी निगरानी
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा, साइबर अपराधों की रोकथाम और सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कंटेंट मॉडरेशन और सुरक्षा मानकों को लेकर नियम और अधिक सख्त हो सकते हैं।