कोलकाता: कोलकाता शहर में फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि बंगाली संस्कृति और आत्मगौरव की पहचान है। रविवार को साल्ट लेक के विवेकानंद युवाभारती क्रीड़ांगन (युवाभारती स्टेडियम) में भारतीय फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी जंग होने जा रही है। इंडियन सुपर लीग (ISL) की अंक तालिका में फिलहाल ईस्ट बंगाल की टीम शीर्ष (पहले स्थान) पर काबिज है, जबकि उसकी चिरप्रतिद्वंद्वी मोहन बागान की टीम दूसरे स्थान पर मजबूती से टिकी हुई है। रविवार को होने वाली इस 'महा-डर्बी' में जो भी टीम बाजी मारेगी, आईएसएल का खिताब सीधे तौर पर उसकी मुट्ठी में होगा। आईएसएल के इतिहास में यह पहली बार होने जा रहा है जब देश की इस सर्वोच्च लीग के चैंपियन का भाग्य सीधे तौर पर एक डर्बी मैच से तय होगा। इस महा-मुकाबले को लेकर पूरे कोलकाता और देश भर के फुटबॉल प्रेमियों में उत्साह चरम पर है।
क्या कहता है इतिहास? पहले कब-कब डर्बी से तय हुआ लीग का भाग्य?
बंगाली दर्शकों के इस पसंदीदा बड़े मैच (बड़ो मैच) का इतिहास 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। हालांकि आईएसएल में ऐसा पहली बार हो रहा है, लेकिन अगर भारतीय फुटबॉल के इतिहास के पन्नों को पलटें, तो पहले भी डर्बी मैचों ने देश की सर्वोच्च लीग का भाग्य तय किया है:
2017-18 आई-लीग (I-League) सीजन: इस सीजन की आखिरी डर्बी ने खिताब की रेस बदल दी थी। 21 जनवरी को हुए उस कड़े मुकाबले में मोहन बागान ने ईस्ट बंगाल को 2-0 से हरा दिया था। इस हार का खामियाजा ईस्ट बंगाल को भुगतना पड़ा और वह महज 1 अंक के अंतर से चेन्नई सिटी एफसी से खिताब हार गई थी।
कलकत्ता फुटबॉल लीग (CFL) के ऐतिहासिक प्ले-ऑफ: अतीत में स्थानीय कलकत्ता लीग का फैसला करने के लिए दोनों टीमों के बीच कई बार प्ले-ऑफ मैच हुए हैं। सबसे यादगार मुकाबला 1962 में खेला गया था, जहां लीग खिताब के लिए दोनों टीमें अंतिम मैच में आमने-सामने थीं और जीत ईस्ट बंगाल के हाथ लगी थी।
1998 और 2002 के मुकाबले: इसके अलावा 1998 और 2002 में भी लीग के अंतिम फैसले के लिए इन दोनों दिग्गजों के बीच निर्णायक मैच हुए थे, और इन दोनों ही मौकों पर ईस्ट बंगाल चैंपियन बनने में सफल रहा था।
प्रशंसकों के लिए विशेष बस, मेट्रो और फेरी सेवा की व्यवस्था
मैदान की क्षमता भले ही आज बकेट सीटों के कारण घटकर 65 हजार रह गई हो, लेकिन टिकटों की मांग अनंत है। रविवार के मैच के सारे टिकट लगभग खत्म हो चुके हैं। स्टेडियम में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। मैच खत्म होने के बाद समर्थकों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए शहर के विभिन्न रूटों पर 200 विशेष बसें चलाई जाएंगी। इसके साथ ही देर रात तक मेट्रो और फेरी (नाव) सेवाओं का भी विशेष संचालन किया जाएगा।
टूटू बाबू को समर्पित होगी यह डर्बी, भावुक हुए प्रशंसक
इस बार की डर्बी सिर्फ खेल के लिहाज से ही नहीं, बल्कि भावनाओं के स्तर पर भी बेहद खास है। हाल ही में मोहन बागान के प्राणपुरुष और दिग्गज फुटबॉल प्रशासक अंजान मित्रा (टूटू बाबू) का निधन हो गया है। हरे-मैरून (मोहन बागान) समर्थक चाहते हैं कि उनकी टीम यह डर्बी जीतकर स्वर्गीय टूटू बाबू को सच्ची श्रद्धांजलि दे। खेल भावना का परिचय देते हुए ईस्ट बंगाल की कार्यकारी समिति (Executive Committee) की बैठक में भी टूटू बाबू की याद में मौन रखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। अब पूरी खेल दुनिया की नजरें युवाभारती स्टेडियम के रेफरी की सीटी और किक-ऑफ पर टिकी हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी ये दो महाशक्तियां टकराती हैं, मैदान पर रोमांच की सारी सीमाएं टूट जाती हैं।