कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन को लेकर बड़ा निर्देश जारी किया है। शनिवार को डायमंड हार्बर में हुई उच्चस्तरीय प्रशासनिक समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि वर्ष 2021 के बाद हुई पुलिस ज्यादती, राजनीतिक हिंसा और उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों को अब सभी थानों में अनिवार्य रूप से स्वीकार करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों के साथ पिछले पांच वर्षों में अन्याय हुआ है, वे बिना डर थाने जाकर नई FIR दर्ज करा सकते हैं। पुलिस किसी भी शिकायत को लेने से मना नहीं करेगी। सरकार “कानून के शासन” को प्राथमिकता देगी।
चार मामलों में दर्ज होंगी नई शिकायतें
सरकार की ओर से जिन मामलों को प्राथमिकता दी गई है, उनमें राजनीतिक हिंसा, पुलिस बर्बरता, महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न और अवैध वसूली या रिश्वतखोरी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया तेज की जाए।
मंत्रियों के स्टाफ के इशारे पर नहीं चलेगी पुलिस
पूर्व सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बीते वर्षों में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह राजनीतिक दबाव में काम कर रही थी। उन्होंने कहा कि कई बार मंत्रियों के निजी कर्मचारी सीधे पुलिस अधिकारियों को निर्देश देते थे, जिससे प्रशासनिक अनुशासन प्रभावित हुआ।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब पुलिस केवल कानून और प्रशासनिक नियमों के तहत काम करेगी।
प्रशासनिक बैठकों में खत्म होगी राजनीतिक भाषणबाजी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पेशेवर तरीके से काम करने देने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक बैठकों में अब राजनीतिक भाषण या अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से नाम लेकर संबोधित करने जैसी परंपराओं को समाप्त किया जाएगा। सरकार का फोकस अब “प्रोफेशनल गवर्नेंस मॉडल” पर रहेगा।
पुलिस वेलफेयर बोर्ड भंग
सरकार ने पूर्ववर्ती शासनकाल में गठित पुलिस वेलफेयर बोर्ड को तत्काल प्रभाव से भंग करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री का आरोप है कि यह बोर्ड अपने मूल उद्देश्य से हटकर राजनीतिक प्रभाव में काम कर रहा था।
उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों से चर्चा के बाद अगले तीन महीनों में नया प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जाएगा।
अवैध वसूली पर सख्त चेतावनी
मुख्यमंत्री ने ऑटो, ई-रिक्शा चालकों और फेरीवालों से होने वाली कथित अवैध वसूली पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बिना सरकारी रसीद के कोई भी भुगतान न किया जाए। यदि कोई जबरन पैसे मांगता है, तो लोग सीधे थाने में शिकायत दर्ज कराएं।