भोपाल। देश में न्यायिक व्यवस्था को तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शनिवार को ‘यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस मॉडल’ लॉन्च किया। यह देश का पहला ऐसा एकीकृत डिजिटल सिस्टम है, जिसमें पुलिस, न्यायालय, जेल, फॉरेंसिक और मेडिकल से जुड़े प्लेटफॉर्म रियल-टाइम में आपस में कनेक्ट कर दिए गए हैं।
क्या है यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस मॉडल
इस मॉडल के तहत आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े सभी प्रमुख विभागों को एक साझा डिजिटल नेटवर्क पर लाया गया है। केस दर्ज होने से लेकर अदालत के आदेश और जेल तक की कार्रवाई अब एक ही डिजिटल चेन में दर्ज और ट्रैक की जा सकेगी।
जमानत आदेश अब तुरंत होंगे लागू
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद जैसे ही कोर्ट से जमानत आदेश जारी होगा, उसकी डिजिटल कॉपी तुरंत पुलिस और जेल प्रशासन के सिस्टम तक पहुंच जाएगी। इससे कागजी प्रक्रिया, देरी और मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत काफी हद तक खत्म होगी।
जांच और ट्रायल में आएगी तेजी
पुलिस की केस डायरी और चार्जशीट डिजिटल रूप से कोर्ट तक पहुंचेगी
फॉरेंसिक और मेडिकल रिपोर्ट सीधे सिस्टम में अपलोड होंगी
अदालत को सभी जरूरी दस्तावेज एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे
इससे जांच, सुनवाई और फैसले की प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज और पारदर्शी होगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी
डिजिटल इंटीग्रेशन से हर स्तर पर कार्रवाई का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि सिस्टम में जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
देश के लिए बनेगा मॉडल
हाईकोर्ट का मानना है कि यह पहल भविष्य में देश की अन्य अदालतों और राज्यों के लिए भी रोल मॉडल साबित हो सकती है। डिजिटल जस्टिस सिस्टम से न्याय सस्ता, तेज और आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनेगा।