कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक हिंसा को लेकर माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने दावा किया है कि चुनाव परिणाम आने के बाद सिर्फ 10 दिनों के भीतर पार्टी के 10 नेता–कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है, जबकि 3000 से अधिक कार्यकर्ता और समर्थक हिंसा का शिकार हुए हैं।
तृणमूल की तीन फैक्ट फाइंडिंग टीमें शनिवार को हुगली, पूर्व मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना के विभिन्न इलाकों में पहुंचीं। टीमों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और कथित तौर पर तोड़े गए पार्टी कार्यालयों का निरीक्षण किया।
कालीघाट में ममता–अभिषेक की बड़ी बैठक
इधर, कालीघाट स्थित कार्यालय में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने पार्टी की लीगल सेल के साथ अहम बैठक की। बैठक में चुनाव बाद हिंसा और हाईकोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई की रणनीति पर चर्चा हुई।
बताया जा रहा है कि तृणमूल अब अदालत में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने की तैयारी कर रही है।
हुगली में हत्या और हमले का आरोप
सांसद सामिरुल इस्लाम, प्रतिमा मंडल और पूर्व मंत्री बिरबाहा हांसदा की टीम हुगली के गोघाट स्थित नकुंडा गांव पहुंची, जहां 9 मई को स्थानीय TMC नेता सहदेव बाग की हत्या हुई थी।
टीम ने मृतक की पत्नी चायना बाग से मुलाकात की। वहीं तृणमूल ने आरोप लगाया कि पुरशुड़ा और आरामबाग में भी भाजपा समर्थित लोगों ने पार्टी नेताओं के घरों और परिवारों पर हमला किया।
दक्षिण 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर में भी तनाव
सांसद सुष्मिता देव, साजदा अहमद और प्रसून बंद्योपाध्याय की टीम दक्षिण 24 परगना के कई इलाकों में पहुंची। मथुरापुर में TMC कार्यालय में तोड़फोड़ का आरोप लगाया गया।
सुष्मिता देव ने दावा किया कि हिंसा के दौरान केंद्रीय बलों ने तृणमूल कार्यकर्ताओं को सुरक्षा नहीं दी।
वहीं सांसद डोला सेन ने आरोप लगाया कि भाजपा निर्वाचित पंचायत समितियों को तोड़ने के लिए दबाव बना रही है।
भाजपा ने आरोपों को बताया “राजनीतिक ड्रामा”
भाजपा ने तृणमूल के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। पार्टी प्रवक्ता देवजीत सरकार ने कहा कि “तृणमूल के लोग ही आपसी संघर्ष में मारे गए हैं। फैक्ट फाइंडिंग टीम सिर्फ राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रभावित लोगों की सूची दी जाती है तो 2021 की हिंसा में शामिल लोगों के नाम उसमें नहीं होने चाहिए।