भोपाल । पेट्रोल - डीजल की मूल्यवृद्धि के बाद अब मध्यप्रदेश के लोगों पर एक और मुसीबत आने वाली है। एमपी में बसों का किराया बढ़ सकता है। डीजल और वाहन पार्ट्स की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण बस ऑपरेटरों ने किराए में 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की मांग सरकार से की है। ऑपरेटरों का कहना है कि 2021 के बाद से किराया नहीं बढ़ा है, जबकि संचालन लागत में भारी इजाफा हुआ है। अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से ही कई उत्पादों के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस बढ़ोतरी के बाद निजी बस ऑपरेटरों ने बस किराये में बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी है।
डीजल और पार्ट्स की बढ़ती कीमतें
प्राइम रूट बस ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पंडित गोविंद शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार की पेट्रोलियम कंपनियों ने हाल ही में डीजल की कीमत 3.15 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी है। इसके साथ ही टायर, लुब्रिकेंट और अन्य पार्ट्स की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं। जिसके चलते बस ऑपरेटर्स का खर्चा लगातार बढ़ता जा रहा है। जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। गोविंद शर्मा के मुताबिक 2021 के बाद से बसों का किराया नहीं बढ़ा है। इस दौरान डीजल की कीमत 80 रुपये से बढ़कर 96 रुपये प्रति लीटर हो चुकी है। वर्तमान में बस किराया लगभग 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर है।
ऑपरेटरों पर बढ़ता आर्थिक बोझ
बस ऑपरेटरों का कहना है कि बस बॉडी निर्माण, वाहन मेंटेनेंस और सुरक्षा उपकरणों की लागत में 50-60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ऑपरेटरों का कहना है कि इतनी बढ़ती लागत के साथ बिना किराया बढ़ाए बस सेवा चलाना मुश्किल हो गया है। ऑपरेटरों ने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और परिवहन विभाग को पत्र भेजकर किराए में उचित वृद्धि की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि किराया बढ़ाने से न केवल ऑपरेटरों का आर्थिक बोझ कम होगा बल्कि यात्रियों को भी सुरक्षित और नियमित बस सेवा मिलती रहेगी।