केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाले Special Additional Excise Duty (SAED) में एक बार फिर बदलाव किया है। इस संबंध में 15 मई 2026 को अधिसूचना जारी की गई, जबकि नई दरें 16 मई 2026 यानी आज से लागू हो गई हैं।
नई दरें क्या हैं?
पेट्रोल के निर्यात पर अब 3 रुपये प्रति लीटर SAED लगाया जाएगा।
डीजल पर यह शुल्क 16.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है।
ATF यानी विमान ईंधन पर 16 रुपये प्रति लीटर SAED लागू होगा।
तीनों ईंधनों पर Road and Infrastructure Cess (RIC) फिलहाल शून्य रखा गया है।
सरकार ने साफ किया है कि इन बदलावों का घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्या है SAED और क्यों लगाया जाता है?
Special Additional Excise Duty (SAED) ऐसा टैक्स है जिसे सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों के आधार पर हर दो सप्ताह में तय करती है।
जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तब भारतीय रिफाइनरियों को निर्यात में ज्यादा मुनाफा मिलता है। ऐसे में कंपनियां घरेलू बाजार की बजाय विदेशी बाजार में ज्यादा ईंधन भेजने लगती हैं, जिससे देश में सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।
इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार SAED लगाती है, ताकि निर्यात महंगा हो और घरेलू आपूर्ति बनी रहे। वहीं, जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम होती हैं तो सरकार इस शुल्क में राहत भी देती है।
27 मार्च 2026 से हुई थी शुरुआत
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल संकट के बीच घरेलू ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2026 से पहली बार SAED लागू किया था।
अप्रैल में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं। उस समय सरकार ने डीजल पर SAED बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया था।
इसके बाद 1 मई को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी आने पर डीजल पर शुल्क घटाकर 23 रुपये और ATF पर 33 रुपये प्रति लीटर किया गया। अब 16 मई से लागू नई दरों के तहत डीजल पर SAED 16.5 रुपये और ATF पर 16 रुपये प्रति लीटर रह गया है।
पेट्रोल पर पहली बार लगा SAED
इस संशोधन की सबसे खास बात यह है कि पहली बार पेट्रोल के निर्यात पर भी SAED लगाया गया है। अब तक पेट्रोल निर्यात पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं था, लेकिन इस बार सरकार ने 3 रुपये प्रति लीटर टैक्स लगाने का फैसला किया है।
जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में कुछ गिरावट के बावजूद पेट्रोल निर्यात अभी भी रिफाइनरियों के लिए फायदे का सौदा बना हुआ है। यही वजह है कि सरकार ने पेट्रोल को भी पहली बार SAED के दायरे में शामिल किया है।