आज वट सावित्री व्रत रखा जा रहा है हिंदू धर्म में यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह हर वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। इस व्रत का संबंध पौराणिक सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा हुआ है।
वट सावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह से प्रारंभ हो चुकी है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार व्रत आज ही रखा जा रहा है। अमावस्या तिथि 16 मई सुबह 05 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 17 मई रात 01 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगी।
वट सावित्री पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 12 मिनट से 08 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।
वट सावित्री व्रत की पूजन विधि
इस दिन महिलाएं प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और वट (बरगद) वृक्ष के नीचे विधिवत पूजा करती हैं। पूजा के दौरान कच्चा सूत लेकर वृक्ष की परिक्रमा की जाती है और जल, फूल, रोली एवं अक्षत अर्पित किए जाते हैं।
इसके बाद सावित्री और सत्यवान की कथा का श्रवण या पाठ किया जाता है तथा पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।