मध्य प्रदेश में बिजली खरीद समझौतों (MOU) को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। अब राज्य में किसी भी लॉन्ग टर्म या मध्यकालीन बिजली खरीद और बिजली सप्लाई से जुड़े एमओयू कैबिनेट की पूर्व मंजूरी के बिना लागू नहीं किए जाएंगे।
बोर्ड बैठक में लिया गया अहम निर्णय
यह फैसला Madhya Pradesh Power Management Company Limited की बोर्ड बैठक में लिया गया। प्रदेश में फिलहाल करीब 1,795 छोटे-बड़े, लघु और दीर्घ अवधि के बिजली खरीद समझौते लागू हैं, जिनके माध्यम से लगभग 26,012 मेगावॉट बिजली की सप्लाई की जा रही है।
नई प्रक्रिया के तहत होगी मंजूरी
- ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत पहले बोर्ड का प्रस्ताव ऊर्जा मंत्री Pradyumn Singh Tomar को भेजा जाएगा।
- इसके बाद मुख्य सचिव के माध्यम से प्रस्ताव मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
- कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद ही संबंधित नीति और एमओयू लागू किए जाएंगे।
पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
सरकार के इस फैसले को बिजली खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। नई व्यवस्था से बिजली खरीद समझौतों की बेहतर मॉनिटरिंग हो सकेगी और बड़े फैसलों में जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।