नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि अमेरिका के साथ हुआ व्यापार समझौता देशहित में नहीं, बल्कि उद्योगपति गौतम अडाणी को राहत दिलाने के लिए किया गया सौदा है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने “ट्रेड डील नहीं, बल्कि अडाणी की रिहाई का सौदा किया है।”
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पीछे असली मकसद गौतम अडाणी को अमेरिकी कानूनी कार्रवाई से राहत दिलाना है। उन्होंने कहा कि सरकार देशहित के बजाय बड़े उद्योगपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। राहुल गांधी की यह प्रतिक्रिया उन रिपोर्ट्स के बाद आई, जिनमें दावा किया गया कि अमेरिकी प्रशासन अडाणी समूह से जुड़े मामले के निपटारे को लेकर सहमत हो सकता है।
जयराम रमेश ने भी साधा निशाना
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अब यह साफ हो गया है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में सरकार अमेरिका के दबाव में झुक गई। जयराम रमेश ने X पर लिखा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय हित से ऊपर अमेरिकी दबाव को रखा और कई अहम फैसले उसी दबाव में लिए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि ट्रंप प्रशासन अडाणी से जुड़े भ्रष्टाचार मामलों को खत्म करने की तैयारी कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला अमेरिका की वित्तीय नियामक संस्था SEC (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन) द्वारा दायर मुकदमे से जुड़ा है। मुकदमे में आरोप लगाया गया था कि गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी ने 2020 से 2024 के बीच भारतीय अधिकारियों को करीब 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई थी। आरोपों के मुताबिक, यह रिश्वत भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़े बड़े सरकारी ठेके हासिल करने के लिए दी गई थी। इन परियोजनाओं से करीब 20 वर्षों में 2 अरब डॉलर तक के मुनाफे की उम्मीद जताई गई थी। मुकदमे में यह भी दावा किया गया कि अडाणी समूह ने अमेरिकी कंपनियों और निवेशकों से अरबों डॉलर का निवेश जुटाया, जबकि भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों को लेकर कथित तौर पर भ्रामक जानकारी दी गई। हालांकि अडाणी समूह ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
राजनीतिक घमासान तेज
इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस लगातार मोदी सरकार पर उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा रही है, जबकि सरकार की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।