धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर माना है। फैसले के बाद पूरे धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन हाई अलर्ट पर है। शहर में फ्लैग मार्च निकाला गया और भोजशाला परिसर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
हाईकोर्ट में लंबे समय से चल रही थी सुनवाई
इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस मामले में दाखिल पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन पर सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। फैसले के बाद प्रशासन ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी है।
जुमे की नमाज के बीच सुरक्षा बढ़ाई गई
एएसआई संरक्षित भोजशाला परिसर में हर शुक्रवार जुमे की नमाज अदा की जाती है। इसी को देखते हुए प्रशासन पहले से अलर्ट मोड पर था। दोपहर बाद मुस्लिम समाज के लोग नमाज के लिए पहुंचे, जबकि भोजशाला और आसपास करीब 500 मीटर क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।
हिंदू पक्ष ने क्या दावा किया था?
हिंदू पक्ष का कहना है कि परमार वंश के राजा भोज ने वर्ष 1034 में यहां देवी सरस्वती का मंदिर बनवाया था। दावा किया गया कि वर्ष 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के आदेश पर मंदिर को तोड़ा गया और उसके अवशेषों का इस्तेमाल कर कमाल मौला मस्जिद का निर्माण किया गया।
प्रशासन पूरी तरह सतर्क
फैसले के बाद धार जिले में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी तरह की भ्रामक जानकारी न फैले।