भोपाल। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने न्याय व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए डिजिटल क्रांति की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस कल्चर एंड इंफॉर्मेशन सेंटर में आयोजित ‘फ्रेगमेंटेशन ऑफ फ्यूजन: एम्पावरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन’ कार्यक्रम में कई अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए गए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और सुप्रीम कोर्ट के कई न्यायाधीश मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने तकनीकी नवाचारों के जरिए न्याय व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में तकनीक ही बेहतर प्रशासन और त्वरित न्याय का सबसे मजबूत माध्यम बन चुकी है।
सम्राट विक्रमादित्य की न्याय परंपरा का उल्लेख
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा और सम्राट विक्रमादित्य के न्याय मॉडल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था का इतिहास बेहद समृद्ध रहा है और सम्राट विक्रमादित्य का सुशासन आज भी आदर्श माना जाता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में न्याय प्रक्रिया को सरल बनाने में डिजिटल तकनीक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। मध्यप्रदेश सरकार भी लगातार ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा दे रही है। साइबर तहसील, ई-फाइल प्रक्रिया और डिजिटल प्रशासनिक व्यवस्थाएं इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
CJI सूर्यकांत बोले- न्यायपालिका को 24X7 व्यवस्था की ओर बढ़ना होगा
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कार्यक्रम में कहा कि अब समय आ गया है जब न्यायपालिका भी अस्पतालों की तरह चौबीसों घंटे कार्य करने वाली व्यवस्था की ओर बढ़े। उन्होंने कहा कि जैसे अस्पतालों में मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री एक क्लिक पर उपलब्ध हो जाती है, उसी प्रकार कोर्ट, पुलिस, जेल, फॉरेंसिक और मेडिकल सिस्टम को भी डिजिटल रूप से एकीकृत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में देरी लंबे समय से एक बड़ी चिंता रही है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी समन्वय के जरिए आम लोगों को त्वरित राहत देना संभव हो सकेगा। उन्होंने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की पहल को देश के लिए मॉडल बताते हुए कहा कि भविष्य में इस व्यवस्था को अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने कहा- ईज ऑफ जस्टिस की दिशा में बड़ा कदम
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश न्यायिक सुधारों और तकनीकी एकीकरण के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ट्रांसफॉर्म, रिफॉर्म और परफॉर्म की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डिजिटल तकनीक अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि न्याय व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने देशभर की अदालतों को नई दिशा दिखाई है।
हाई कोर्ट ने लॉन्च किए कई आधुनिक डिजिटल सिस्टम
कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने कई डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए। इनमें लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए CLASS सिस्टम सबसे खास रहा। यह एक ओटीटी स्टाइल डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिससे कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग पर हाई कोर्ट का सीधा नियंत्रण रहेगा। इसके अलावा नया हाई कोर्ट पोर्टल भी लॉन्च किया गया, जहां जज, वकील और फरियादियों को कोर्ट ऑर्डर, बेल एप्लिकेशन और अन्य जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध होंगे।
हाई कोर्ट ने ‘प्रथम’ नाम का एआई आधारित डेटा मैनेजमेंट सिस्टम भी शुरू किया है, जिससे न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और तेजी आएगी। वहीं कॉपीइंग ऑटोमेशन एंड ज्यूडिशियल इंफॉर्मेशन सिस्टम के जरिए अब फैसलों की सर्टिफाइड कॉपी डिजिटल रूप से उपलब्ध कराई जाएगी।
मूक-बधिर नागरिकों के लिए लॉन्च हुआ ‘संकेत वाणी’ एप
कार्यक्रम में मूक और श्रवण बाधित नागरिकों की सहायता के लिए ‘संकेत वाणी’ मोबाइल एप भी लॉन्च किया गया। इस एप के जरिए विशेष जरूरत वाले नागरिकों को न्याय प्रक्रिया से जोड़ने में मदद मिलेगी। इसके अलावा प्री-मैच्योर प्रिजनर रिलीज के लिए ऑनलाइन क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की शुरुआत की गई, जिससे बंदियों से जुड़े मामलों की प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी हो सकेगी।
न्याय व्यवस्था में तेजी लाने की दिशा में बड़ा बदलाव
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अब फरियादियों को फैसलों की कॉपी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कोर्ट, पुलिस, जेल और फॉरेंसिक विभागों के बीच रियल टाइम डेटा शेयरिंग से न्यायिक प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी बनेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘वन केस-वन डेटा’ की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे न्यायिक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और आम लोगों को राहत मिलेगी।