भोजशाला में नई गाइडलाइन लागू होने के बाद रविवार सुबह पूजा-अर्चना शुरू हो गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां वाग्देवी के चित्र लेकर पहुंचे और विधि-विधान से अनुष्ठान किया। परिसर में सुबह से धार्मिक उत्साह का माहौल देखने को मिला।
गोमूत्र से शुद्धिकरण के बाद पूजा
पूजा से पहले भोजशाला परिसर और गर्भगृह का गोमूत्र से शुद्धिकरण किया गया। इसके बाद रंगोली से गर्भगृह को सजाया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा शुरू हुई। श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी की आराधना की और महाआरती में हिस्सा लिया।
अखंड ज्योत को गर्भगृह में स्थापित किया
भोजशाला परिसर के बाहर स्थित ज्योति मंदिर की अखंड ज्योत को गर्भगृह में स्थापित किया गया। सूर्योदय के साथ धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुए। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भजन, जयकारे और नृत्य के साथ खुशी व्यक्त की।
नेताओं और अधिकारियों ने भी किए दर्शन
शनिवार शाम सावित्री ठाकुर और संत महामंडलेश्वर निसर्ग दास भोजशाला पहुंचे। वहीं राजीव रंजन मीना और सचिन शर्मा ने भी पहुंचकर पूजा-अर्चना की।
11:45 बजे हुई महाआरती
भोज उत्सव समिति के कार्यकर्ता सुबह से मौजूद रहे। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि दोपहर 11:45 बजे महाआरती संपन्न हुई। इसके साथ भोजशाला में धार्मिक कार्यक्रमों का क्रम आगे भी जारी रहेगा।
भोजशाला को भव्य बनाने की तैयारी
मोहन यादव ने कहा है कि भोजशाला को उसके प्राचीन वैभव के अनुरूप विकसित किया जाएगा। सरकार इसे धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में संवारेगी, ताकि देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंच सकें।