नई दिल्ली. कारगिल युद्ध के दौरान भारत को दुश्मन की सटीक लोकेशन जानने के लिए अमेरिकी GPS की जरूरत पड़ी थी। लेकिन अमेरिका ने भारत को GPS से जुड़ी सैन्य सहायता देने से इनकार कर दिया। उस समय भारत के पास अपना कोई स्वतंत्र सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम नहीं था। इस घटना ने राष्ट्रीय सुरक्षा में विदेशी तकनीक पर निर्भरता के जोखिम को उजागर कर दिया। युद्ध के मैदान में सही जानकारी की कमी ने नीति निर्माताओं को झकझोर दिया। इसी अनुभव ने भारत की अंतरिक्ष नीति की दिशा बदल दी। आत्मनिर्भरता की जरूरत का अहसास गहरा हुआ।
स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम की जरूरत
अमेरिका का GPS दुनिया की प्रमुख सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली है जिसका संचालन अमेरिकी सरकार करती है। कारगिल की घटना ने स्पष्ट कर दिया कि सुरक्षा मामलों में किसी दूसरे देश की तकनीक पर पूरी तरह निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है। भारत ने अपना क्षेत्रीय नेविगेशन सिस्टम विकसित करने का फैसला लिया। विदेशी सहायता के इनकार ने स्वदेशी क्षमता निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी। दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता का लक्ष्य सामने आया। राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।
NavIC की यात्रा और विकास
इसी प्रयास का नतीजा NavIC यानी Navigation with Indian Constellation है। इसे पहले भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम IRNSS के नाम से जाना जाता था। इसकी शुरुआत 1999 के कारगिल युद्ध के बाद हुई और 2013 में पहला सैटेलाइट लॉन्च किया गया। NavIC भारत के साथ-साथ इसकी सीमाओं से करीब 1500 किलोमीटर आगे तक के क्षेत्र में सेवाएं देने के लिए तैयार किया गया है। क्षेत्रीय कवरेज पर आधारित यह प्रणाली नागरिक और सैन्य दोनों उपयोगों के लिए महत्वपूर्ण है। धीरे-धीरे नक्षत्र को पूरा करने का काम जारी रहा।
NVS-03 का सफल प्रक्षेपण
इसरो ने शुक्रवार 30 अक्टूबर की रात GSLV-F18 रॉकेट से NVS-03 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण किया। यह सैटेलाइट भारत के अपने नेविगेशन सिस्टम NavIC को फिर से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। रॉकेट ने सैटेलाइट को निर्धारित ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। NVS-03 नई पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट्स में शामिल है। इसका वजन करीब 2232 किलोग्राम है। प्रक्षेपण की सफलता ने स्वदेशी क्षमता पर विश्वास को और बढ़ाया है।
स्वदेशी परमाणु घड़ी की खासियत
NVS-03 की सबसे बड़ी खासियत इसमें लगी स्वदेशी परमाणु घड़ी है। यह घड़ी बेहद सटीक समय बताती है। सैटेलाइट से किसी व्यक्ति या वाहन की सही लोकेशन पता करने के लिए समय का सटीक होना बेहद जरूरी है। परमाणु घड़ी की सटीकता नेविगेशन की विश्वसनीयता तय करती है। स्वदेशी तकनीक से बनी यह घड़ी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। विदेशी घटकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में यह बड़ा कदम है। सटीक समय मापन से पूरे सिस्टम की दक्षता बढ़ेगी।
रणनीतिक महत्व और भविष्य
NVS-03 के लॉन्च से NavIC प्रणाली और मजबूत हुई है। सैन्य अनुप्रयोगों के साथ नागरिक सेवाओं जैसे परिवहन आपदा प्रबंधन और सर्वेक्षण में इसकी भूमिका बढ़ेगी। कारगिल के सबक को याद रखते हुए भारत ने आत्मनिर्भरता का मार्ग चुना। आने वाले वर्षों में और सैटेलाइट्स जोड़कर प्रणाली को पूर्ण क्षमता तक पहुंचाया जाएगा। क्षेत्रीय सुरक्षा और तकनीकी स्वायत्तता दोनों को बल मिला है। इसरो की यह कामयाबी अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।