बेंगलुरु/मंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने तटीय क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग पर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की अध्यक्षता में शुक्रवार को मंगलुरु में हुई कैबिनेट बैठक में दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में तुलु को राज्य की दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा का दर्जा देने का निर्णय लिया गया।
यह फैसला ऐसे समय में हुआ है जब सरकार ने पहली बार राज्य की राजधानी बेंगलुरु से बाहर मंगलुरु में कैबिनेट बैठक आयोजित की। बैठक में तटीय कर्नाटक के विकास से जुड़े कई अन्य प्रस्तावों पर भी फैसले लिए गए।
दक्षिण कन्नड़ और उडुपी में लागू होगा फैसला
कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि तुलु को दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में लागू किया जाएगा और इसे राज्य की दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा घोषित किया गया है। यह फैसला तुलु भाषा को आधिकारिक प्रशासनिक पहचान देने की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद आया है।कन्नड़ कर्नाटक की मुख्य आधिकारिक भाषा है। 2011 की जनगणना के मुताबिक उस समय कर्नाटक में 18 लाख से अधिक लोगों ने तुलु को अपनी मातृभाषा बताया था।
पहली बार मंगलुरु में हुई कैबिनेट बैठक
कर्नाटक के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब राज्य मंत्रिमंडल की बैठक बेंगलुरु के बजाय मंगलुरु में आयोजित की गई। सरकार ने इस कदम को तटीय क्षेत्र की जरूरतों और विकास संबंधी मुद्दों को सीधे प्राथमिकता देने से जोड़ा है। कैबिनेट ने इस बैठक में तटीय और मलनाड क्षेत्र के लिए Coastal-Malnad Karnataka Tourism Policy 2026 को भी मंजूरी दी। इसके अलावा करीब 32,611 करोड़ रुपये के विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
तटीय कर्नाटक में BJP का मजबूत चुनावी प्रदर्शन
मंगलुरु में कैबिनेट बैठक के राजनीतिक संदर्भ की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि दक्षिण कन्नड़ और उडुपी लंबे समय से BJP के मजबूत चुनावी क्षेत्रों में रहे हैं।2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में BJP ने दोनों जिलों की 13 विधानसभा सीटों में से 11 पर जीत दर्ज की थी। उडुपी की सभी पांच सीटें BJP के खाते में गई थीं, जबकि दक्षिण कन्नड़ की आठ में से छह सीटों पर पार्टी ने जीत हासिल की। कांग्रेस को इन दोनों जिलों में दो सीटें मिली थीं।हालांकि पूरे कर्नाटक में 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 135 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि BJP को 66 सीटें मिली थीं।
BJP सरकार ने भी उठाया था तुलु भाषा का मुद्दा
तुलु को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग नई नहीं है। जनवरी 2023 में तत्कालीन BJP सरकार ने तुलु को राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा देने के प्रस्ताव की जांच के लिए एक समिति गठित की थी।इस लिहाज से मौजूदा सरकार का फैसला उस लंबे समय से चली आ रही मांग पर आगे बढ़ने के रूप में देखा जा रहा है।
तटीय क्षेत्र के लिए कई और बड़े फैसले
मंगलुरु कैबिनेट बैठक में तुलु भाषा के अलावा तटीय कर्नाटक के विकास से जुड़े कई फैसले भी लिए गए। सरकार ने पर्यटन, मत्स्य क्षेत्र और क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी है।सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले 15 महीनों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में 10 से 12 कैबिनेट बैठकें आयोजित की जा सकती हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार प्रशासनिक फैसलों को आगे बढ़ाना बताया गया है।