इस वर्ष मानसून की शुरुआत अपेक्षाकृत कमजोर रहने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई शुरुआती चरण में प्रभावित हुई थी। हालांकि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में अधिकांश कृषि क्षेत्रों में अच्छी वर्षा दर्ज होने से किसानों ने तेजी से बुवाई का कार्य आगे बढ़ाया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 24 जुलाई तक देश में खरीफ फसलों का कुल रकबा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 4.7 प्रतिशत कम रहा। इसके बावजूद हालिया वर्षा ने बुवाई और खेतों की नमी दोनों में सुधार लाकर कृषि गतिविधियों को नई गति प्रदान की है।
मानसून की कमी घटी, किसानों में बढ़ी उम्मीद
मौसम की अनिश्चितता भारतीय कृषि के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती है क्योंकि खरीफ फसलें मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर रहती हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह में कई राज्यों में सक्रिय हुए मानसून ने वर्षा की कमी को काफी हद तक कम किया है। इससे धान, सोयाबीन, मक्का, दालों और तिलहन जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले सप्ताहों में सामान्य वर्षा बनी रहती है तो कुल बुवाई का अंतर और कम हो सकता है तथा उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
जलाशयों में कम भंडारण बना चिंता का कारण
जहां एक ओर वर्षा में सुधार से खेतों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर देश के प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जलाशयों में संग्रहित जल पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले लगभग 36.3 प्रतिशत कम है। यह स्थिति केवल सिंचाई ही नहीं, बल्कि पेयजल, जलविद्युत उत्पादन और रबी फसलों की तैयारी के लिए भी चिंता बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त और सितंबर की वर्षा जलाशयों की स्थिति सुधारने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
कृषि अर्थव्यवस्था पर रहेगा मानसून का सीधा प्रभाव
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और खरीफ मौसम का प्रदर्शन खाद्य उत्पादन, ग्रामीण आय तथा महंगाई पर सीधा असर डालता है। यदि बुवाई का मौजूदा अंतर समय रहते कम हो जाता है और फसलों की वृद्धि के दौरान पर्याप्त वर्षा मिलती है, तो खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार संभव है। इसके विपरीत, यदि वर्षा का वितरण असमान रहता है या जलाशयों का स्तर अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ता, तो सिंचाई पर निर्भर क्षेत्रों में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
आने वाले सप्ताह होंगे कृषि के लिए निर्णायक
विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ मौसम अभी अपने महत्वपूर्ण चरण में है और अगले कुछ सप्ताह पूरे कृषि परिदृश्य की दिशा तय करेंगे। पर्याप्त वर्षा, जल संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन और समय पर कृषि सहायता किसानों को बेहतर उत्पादन की ओर ले जा सकती है। सरकार और कृषि वैज्ञानिक भी लगातार किसानों को मौसम आधारित सलाह जारी कर रहे हैं ताकि बदलते मौसम के अनुरूप खेती की रणनीति अपनाई जा सके। यदि मानसून सामान्य बना रहता है तो खरीफ उत्पादन के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत आधार मिलने की संभावना है।