कोलकाता : कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई शर्तों के तहत मंगलवार को मिली अनुमति के बाद, बुधवार को दक्षिण कोलकाता में निकाली गई कालीघाट पंथी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की रैली रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। बालीगंज फाड़ी से हाजरा तक तय रूट पर निकाली गई इस छात्र-युवा कार्यकर्ताओं की रैली के दौरान तृणमूल और भाजपा (भगवा खेमे) के कार्यकर्ताओं के बीच कई दौर की हिंसक झड़पें हुईं। टीएमसी का आरोप है कि इस हमले में उनकी आईटी सेल की प्रमुख उपासना चौधरी समेत कुल 41 कार्यकर्ता घायल हुए हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज भी करना पड़ा।
घायलों को अस्पताल भेजने के दौरान भड़कीं ममता, कार्यकर्ता को जड़ा थप्पड़
रैली में टीएमसी कार्यकर्ताओं के घायल होने की खबर मिलते ही ममता बनर्जी खुद कालीघाट स्थित अपने आवास से बाहर आ गईं। घायल कार्यकर्ताओं को ममता के आवास के पास बने कार्यालय के सामने लाया गया, जहां से उन्होंने खुद पहल कर घायलों को एसएसकेएम (SSKM) अस्पताल भेजने की व्यवस्था की। इस दौरान अस्पताल परिसर में भारी धक्का-मुक्की के बीच अपनी ही पार्टी के एक कार्यकर्ता के व्यवहार से ममता बनर्जी इस कदर नाराज हो गईं कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से उसके गाल पर सपाटे से थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद उन्होंने सौगत राय और वैश्वानर चटर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं को घायलों की देखभाल के लिए अस्पताल भेजा।

बीजेपी और पुलिस दोनों पर मढ़ा दोष, कोर्ट जाने की चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, "हमने हाईकोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया। लेकिन पुलिस ने खुद अदालत के आदेशों की अवहेलना की है। कोर्ट की अनुमति होने के बावजूद हमारे हैंडमाइक छीन लिए गए और महिलाओं, बुजुर्गों व युवाओं के साथ मारपीट की गई।" उन्होंने कड़े लहजे में कहा, "मैं सिर्फ बीजेपी को ही नहीं, बल्कि पुलिस और प्रशासन को भी इसके लिए जिम्मेदार मानती हूं। हम इस मामले में अदालत की अवहेलना (Contempt of Court) का केस दायर करेंगे।"
विपक्ष का तीखा पलटवार: "मानसिक रूप से टूट चुकी हैं ममता"
ममता बनर्जी के आरोपों पर पलटवार करते हुए बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने टीएमसी शासन के पुराने दौर की याद दिलाई। उन्होंने कहा, "जब कोयला और शिक्षक भर्ती घोटाले में पार्थ चटर्जी और कुणाल घोष पकड़े गए थे, तब पुलिस ने लोगों की आवाज दबाने के लिए क्या-क्या नहीं किया, यह सब जनता ने देखा है।"
वहीं, ममता द्वारा कार्यकर्ता को थप्पड़ मारे जाने के वीडियो पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने तंज कसते हुए कहा, "वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी हैं। वह इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं कि सत्ता उनके हाथ से जा चुकी है, इसीलिए उन्होंने गुस्से में अपने ही कार्यकर्ता को थप्पड़ मार दिया।" बागी टीएमसी (अब एनसीपीआई) सांसद काकली घोष दस्तीदार ने भी इस मुद्दे पर ममता को आड़े हाथों लिया।
चोर-चोर के नारे और छतों से घेराबंदी
कालीघाट खेमे का आरोप है कि सुबह से ही बीजेपी की बाइक वाहिनी हरीश चटर्जी स्ट्रीट पर गश्त कर रही थी और पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया जा रहा था। टीएमसी की रैली के दौरान भगवा ब्रिगेड के कार्यकर्ता साथ-साथ चलते हुए 'चोर-चोर' के नारे लगा रहे थे। हाजरा मोड़ के पास बाइक पर सवार युवा नेता उपासना चौधरी पर हमला किया गया, जिससे वह बाइक समेत गिर गईं। टीएमसी नेता वैश्वानर चटर्जी ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस मूकदर्शक बनी रही और रूट पर अवैध रूप से लगाए गए बीजेपी के माइकों को लेकर पुलिस ने अनभिज्ञता जताई।
बागी नेताओं को ममता की 'घर वापसी' की अपील
इस हंगामे के शांत होने के बाद ममता बनर्जी ने फेसबुक लाइव के जरिए पार्टी छोड़कर गए बागियों से 'घर वापसी' की भावुक अपील की। उन्होंने कहा, "अभी भी समय है, बीजेपी की गोद में बैठने के बजाय अपने घर लौट आएं और खुद से एक बार सवाल करें। इन कार्यकर्ताओं ने आपके लिए अपना खून बहाया है। गद्दारों के बहकावे में आकर अपनी पार्टी से गद्दारी मत कीजिए।"