मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका लगातार बनी हुई है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारत में रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर रणनीतिक तैयारी की जा रही है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता का प्रभाव घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है, इसलिए समय रहते संतुलित वितरण की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
बुकिंग नियमों में बदलाव की तैयारी
देश की प्रमुख गैस आपूर्ति कंपनियां इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस सिलेंडर बुकिंग नियमों में संभावित बदलाव की तैयारी कर रही हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार 1 मई 2026 से नए नियम लागू किए जा सकते हैं, जिनका उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का संतुलित और व्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित करना है।
25 दिनों का अंतर अनिवार्य हो सकता है
नए प्रस्ताव के अनुसार एक सिलेंडर बुकिंग के बाद अगली बुकिंग के लिए न्यूनतम 25 दिनों का अंतर आवश्यक किया जा सकता है। इससे गैस की खपत को संतुलित रखने और सभी उपभोक्ताओं तक समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में इसका प्रभाव अधिक दिखाई दे सकता है, जहां गैस की खपत अपेक्षाकृत अधिक है।
OTP आधारित डिलीवरी से बढ़ेगी पारदर्शिता
गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए OTP आधारित डिलीवरी प्रणाली लागू करने की योजना है। इस व्यवस्था में सिलेंडर डिलीवरी से पहले उपभोक्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर OTP भेजा जाएगा, जिसे डिलीवरी के समय साझा करना आवश्यक होगा। इस प्रक्रिया से वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितताओं पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
आयात पर निर्भरता बनी चुनौती
भारत की LPG जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात पर आधारित है। देश को प्रतिदिन लगभग 80,000 टन गैस की आवश्यकता होती है, जबकि घरेलू उत्पादन लगभग 46,000 टन के आसपास है। शेष मांग को पूरा करने के लिए अन्य देशों से गैस आयात की जाती है। हाल के वर्षों में आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने के प्रयास किए गए हैं, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए संतुलित कदम जरूरी
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बन गई है। सरकार और तेल कंपनियां मिलकर ऐसी व्यवस्थाएं विकसित कर रही हैं, जिससे आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर रखा जा सके। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को असुविधा पहुंचाना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और सभी तक समान रूप से पहुंच सुनिश्चित करना है।