प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एआई इंपैक्ट लीडरशिप समिट 2026 में प्रस्तुत किए गए मानव विजन ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के भविष्य को लेकर वैश्विक बहस में नई ऊर्जा भर दी। उन्होंने कहा कि दुनिया में दो तरह के लोग देखे जा रहे हैं—कुछ लोग एआई को डर की तरह देखते हैं, जबकि दूसरे उसे सौभाग्य की तरह अपनाते हैं। भारत एआई को अवसर की नजर से देखता है, और यही दृष्टिकोण देश को तकनीकी नेतृत्व की ओर अग्रसर कर रहा है। भारतीय कंपनियों द्वारा कई नए एआई मॉडल लॉन्च किए गए, जो भारत के नवाचार–केंद्रित भविष्य की पुष्टि करते हैं।
MANAV विजन का मूल दर्शन
मानव विजन प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पेश एक व्यापक टेक्नोलॉजी दर्शन है, जो पांच मूल सिद्धांतों से मिलकर बना है। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में एआई उसी दिशा में बढ़ेगा, जिस दिशा में मानव उसकी राह तय करेगा। इसलिए यह अनिवार्य है कि एआई का विकास मानवता के हितों से जुड़ा रहे और उसका नेतृत्व नैतिकता और जवाबदेही के साथ आगे बढ़े।
मोरल और एथिकल सिस्टम का आधार
मानव विजन का पहला सिद्धांत यह बताता है कि किसी भी एआई ढांचे को एक मजबूत नैतिक और एथिकल फ्रेमवर्क पर आधारित होना चाहिए। एआई वह शक्ति है जो मानव जीवन के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है, इसलिए उसकी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, नैतिकता और मानव कल्याण की अनिवार्य मौजूदगी आवश्यक है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई का उपयोग तभी सार्थक होगा, जब यह मूलभूत नैतिक मूल्यों का पालन करने वाला उपकरण बने।
जवाबदेह और पारदर्शी गवर्नेंस की आवश्यकता
एआई आधारित समाधानों की बढ़ती पहुँच के बीच जवाबदेह गवर्नेंस प्रमुख आवश्यकता बन गई है। मानव विजन के दूसरे सिद्धांत में प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि एआई को नियंत्रित करने वाले नियम स्पष्ट और पारदर्शी होने चाहिए। जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना एआई से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। एक ऐसी प्रणाली जिसमें जवाबदेही और संरचनात्मक पारदर्शिता मौजूद हो, भविष्य के एआई–इकोसिस्टम को सुरक्षित बनाएगी।
डाटा स्वायत्तता और राष्ट्रीय हित का संरक्षण
डाटा भविष्य का ईंधन है और मानव विजन इसका राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंध स्थापित करता है। पीएम मोदी ने कहा कि जिसका डेटा है उस पर उसका अधिकार होना चाहिए। यह सिद्धांत डिजिटल स्वायत्तता, गोपनीयता संवर्धन और राष्ट्रीय सुरक्षा को एक साथ जोड़ता है। एआई के बढ़ते उपयोग के बीच किसी भी देश के लिए डाटा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि तकनीकी विकास उसके सामरिक हितों के अनुरूप हो।
सुलभ और समावेशी एआई इकोसिस्टम
एआई मोनोपोली के खतरे को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने मानव विजन के चौथे सिद्धांत में स्पष्ट किया कि एआई सबके लिए सुलभ, समावेशी और बहु–स्तरीय होना चाहिए। एआई केवल कुछ कंपनियों या देशों तक सीमित न रहे, बल्कि यह व्यापक मानव समाज को लाभ पहुंचाए। एआई का लोकतंत्रीकरण ही उसे मानवता के हितों का सच्चा उपकरण बना सकता है।
वैध, सुरक्षित और विश्वसनीय एआई संरचना का निर्माण
मानव विजन का अंतिम सिद्धांत एआई की वैधता, विश्वसनीयता और कानूनी मानकों का पालन सुनिश्चित करता है। विविध क्षेत्रों में एआई का उपयोग बढ़ने के साथ ही इसके संचालन को कानून, नीति और सुरक्षा के ढांचे में लाना आवश्यक हो जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह संदेश दिया कि एआई तभी मानवता के लिए वरदान बन सकता है, जब उसकी संरचना पूरी तरह वैध, सुरक्षित और स्थायी हो।
एआई का भविष्य और भारत की भूमिका
पीएम मोदी ने मशीन लर्निंग से लर्निंग मशीन के स्तर तक विकसित हो रही तकनीक के बीच विस्तार से कहा कि आने वाले समय में एआई समाजों और अर्थव्यवस्थाओं के विकास में निर्णायक भूमिका निभाएगा। इसलिए विजन जितना बड़ा होगा, जिम्मेदारी भी उतनी ही आवश्यक होगी। यह विचार भारत की उस रणनीतिक दृष्टि को दर्शाता है, जो एआई को मानव कल्याण का साधन बनाकर भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित टेक्नोलॉजी का वातावरण तैयार करना चाहती है।
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