राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से मप्र की राजधानी भोपाल स्थित शिवनेरी भवन में आयोजित ‘स्त्री शक्ति संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने महिलाओं की भूमिका को समाज, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के लिए केंद्रीय बताया। कार्यक्रम की मूल भावना “नारी तू ही नारायणी” के विचार को केंद्र में रखकर आगे बढ़ी।
हम महिलाओं के कारण सुरक्षित है
‘स्त्री शक्ति संवाद’ कार्यक्रम में प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि जब भी एक सभ्य और सशक्त समाज की बात होती है, तो उसमें महिलाओं की भूमिका स्वतः ही सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कहा - हमारा धर्म, हमारी संस्कृति और हमारी सामाजिक व्यवस्था महिलाओं के कारण ही सुरक्षित है।
महिलाएं हर क्षेत्र में आगे है
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन यादव ने अपने संबोधन में आगे कहा कि भारतीय समाज में नारी केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि संस्कार, परंपरा और सामाजिक संतुलन की संवाहक रही है। RSS प्रमुख ने यह भी कहा कि समय के साथ समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव आया है। भागवत ने कहा कि अब वह दौर पीछे छूट चुका है, जब महिलाओं को केवल सुरक्षा के नाम पर घर की चारदीवारी तक सीमित रखा जाता था। आज के समय में परिवार और समाज दोनों की प्रगति स्त्री और पुरुष के संयुक्त प्रयासों से ही संभव है। इसी कारण दोनों का समान रूप से प्रबोधन और जागरूकता आवश्यक है।
समाज की मजबूती महिलाओं पर निर्भर
RSS प्रमुख मोहन यादव ने इस बात पर जोर दिया कि समाज की मजबूती महिलाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता से सीधे जुड़ी हुई है। स्त्री शक्ति संवाद जैसे कार्यक्रम इसी उद्देश्य से आयोजित किए जाते हैं, ताकि महिलाओं की भूमिका को सही दृष्टिकोण से समझा जा सके और समाज में संतुलन बना रहे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली। वक्ताओं ने नारी शक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक मूल्यों पर भी अपने विचार रखे। आयोजन का उद्देश्य महिलाओं को केवल सशक्त करने तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग में समरसता और सहयोग को बढ़ावा देना रहा।
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