गोवा के मणिपाल अस्पताल में अभिनेता नाना पाटेकर को सुबह 5:20 बजे मेडिकल टीम ने मृत घोषित किया। गंभीर सीने में दर्द की शिकायत के बाद मेडिकल टीम को उनके फ्लैट पर भेजा गया था। वहां वे बेहोशी की हालत में मिले। इसके बाद अस्पताल ले जाया गया।अस्पताल पहुंचने के बाद मेडिकल टीम ने सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया। नाना पाटेकर ने अपनी जिंदगी में संघर्ष से लेकर सफलता तक का लंबा सफर तय किया।
विश्वनाथ से ऐसे बने नाना
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। बचपन में उनकी छोटी बहन उन्हें प्यार से ‘नाना’ कहकर बुलाती थीं। धीरे-धीरे यही नाम उनकी पहचान बन गया और वे फिल्म इंडस्ट्री में इसी नाम से मशहूर हुए।उनके पासपोर्ट और आधार कार्ड पर भी ‘नाना पाटेकर’ नाम ही दर्ज है। आज यही नाम भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित और दमदार अभिनेताओं में शुमार रहा।
सिर्फ 750 रुपये में हुई थी शादी
नाना पाटेकर ने वर्ष 1978 में थिएटर कलाकार नीलकांती पाटेकर से शादी की थी। बताया जाता है कि उनकी शादी का कुल खर्च उस समय महज 750 रुपये आया था।शादी के शुरुआती दिनों में नीलकांती एक बैंक में अधिकारी के पद पर काम करती थीं। उनकी मासिक सैलरी करीब 2500 रुपये थी। वहीं नाना पाटेकर को उस दौर में एक शो के लिए सिर्फ 50 रुपये मिलते थे।यह दौर उनके संघर्ष का था, जब उन्होंने थिएटर के जरिए अपने अभिनय करियर को आगे बढ़ाना शुरू किया।
सेना से था गहरा लगाव, ‘प्रहार’ के लिए ली आर्मी ट्रेनिंग
नाना पाटेकर को भारतीय सेना और जवानों से हमेशा खास लगाव रहा। वर्ष 1991 में आई फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ के निर्देशन के साथ उन्होंने इसमें एक फौजी का किरदार भी निभाया था। इस भूमिका को वास्तविक तरीके से निभाने के लिए उन्होंने भारतीय सेना के साथ कड़ा सैन्य प्रशिक्षण लिया था। सेना के प्रति उनका सम्मान और जुड़ाव उनके सार्वजनिक जीवन में भी कई बार नजर आया।
बड़े बेटे के निधन का गहरा सदमा
नाना पाटेकर की जिंदगी में एक बेहद दुखद दौर तब आया, जब उनके बड़े बेटे का बचपन में ही निधन हो गया। इस घटना ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था।बाद में उनके छोटे बेटे मल्हार पाटेकर के जन्म से उनके जीवन में फिर खुशियां लौटीं। मल्हार ने अभिनय के बजाय फिल्म निर्माण और निर्देशन के क्षेत्र को अपना करियर चुना।
संघर्ष से लेकर पहचान तक का सफर
नाना पाटेकर ने थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की और आगे चलकर हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके अभिनय में गंभीरता, संवाद अदायगी और किरदारों को जीवंत करने की क्षमता की खास छाप देखने को मिली।उनकी जिंदगी का सफर संघर्ष, निजी दुख और सफलता से भरा रहा। विश्वनाथ से ‘नाना’ बनने की कहानी उनके व्यक्तित्व और उनके संघर्ष की एक खास झलक पेश करती है।