पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के नउदा में बुधवार को आयोजित एक बड़ी चुनावी रैली में Asaduddin Owaisi ने सत्ताधारी All India Trinamool Congress, कांग्रेस और वाम दलों पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान वे Humayun Kabir के साथ मंच साझा करते नजर आए।
मुसलमानों को बनाया गया सिर्फ वोट बैंक
ओवैसी ने आरोप लगाया कि पिछले करीब 50 वर्षों से बंगाल में मुसलमानों का इस्तेमाल सिर्फ वोट बैंक के रूप में किया गया है। उन्होंने कहा कि चाहे कांग्रेस हो, वाम मोर्चा या फिर टीएमसी—किसी ने भी मुस्लिम समुदाय के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए ठोस कदम नहीं उठाए। उन्होंने साफ कहा - “मुसलमान अब सिर्फ वोटिंग मशीन बनकर नहीं रहेंगे, अब वे अपना नेतृत्व खुद चुनेंगे।”
AJUP के साथ गठबंधन, ‘नई राजनीति’ का दावा
ओवैसी ने बताया कि उन्होंने All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) और Aam Janata Unnayan Party (AJUP) के बीच गठबंधन किया है, ताकि मुस्लिम समुदाय को राजनीतिक रूप से मजबूत प्रतिनिधित्व मिल सके।
उनका कहना है कि इस गठबंधन से न सिर्फ आर्थिक हालात सुधरेंगे, बल्कि नीति निर्धारण में भी समुदाय की भागीदारी बढ़ेगी।
50 साल का हिसाब मांगेगा मुसलमान
रैली में ओवैसी ने कहा कि अब समय आ गया है कि मुस्लिम समाज अपने वोट की ताकत को पहचाने और 50 साल का हिसाब मांगे। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों ने मुसलमानों को “इंसान नहीं, सिर्फ वोट बैंक” समझा।
TMC के लिए खतरे की घंटी?
मुर्शिदाबाद, जहां करीब 67% मुस्लिम आबादी है, बंगाल की राजनीति में बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में ओवैसी की सक्रियता को Mamata Banerjee और उनकी पार्टी के लिए चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि AIMIM-AJUP गठबंधन अल्पसंख्यक वोटों में सेंध लगाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकता है। ओवैसी का “वोटिंग मशीन नहीं” वाला बयान बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि यह रणनीति चुनावी नतीजों में कितना असर डालती है और क्या यह TMC के मजबूत वोट बैंक में सेंध लगा पाती है।