मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां बाघिन T-213 के 2 वर्षीय शावक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि इस बाघ को हाल ही में रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर के जरिए लगातार निगरानी में रखा गया था, इसके बावजूद उसकी मौत ने पूरे प्रबंधन तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महीने के भीतर दूसरी बार बाघ की मौत ने वन्यजीव संरक्षण की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है।
रेस्क्यू के बाद भी नहीं बच सकी जान, निगरानी पर सवाल
जानकारी के अनुसार, मृत बाघ वही है जिसे 26 अप्रैल 2026 को ग्राम तारा के आबादी क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया था। बाघ को ट्रेंकुलाइज कर रेडियो कॉलर लगाया गया और उसकी हर गतिविधि पर नजर रखने का दावा किया गया। लेकिन महज कुछ ही दिनों में उसकी मौत हो जाना इस पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। जब बाघ लगातार ट्रैकिंग में था, तो उसकी बिगड़ती हालत का पता समय रहते क्यों नहीं चल सका—यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
एक महीने में दूसरी मौत, प्रबंधन की कार्यप्रणाली कटघरे में
गौरतलब है कि पिछले एक महीने में यह दूसरी घटना है, जब पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ की संदिग्ध मौत हुई है। इससे पहले एक वयस्क नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल मिला था। लगातार हो रही इन घटनाओं से साफ संकेत मिलते हैं कि कहीं न कहीं निगरानी, सुरक्षा और रेस्क्यू के बाद की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं। फिलहाल वन विभाग की टीम मौके पर जांच में जुटी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन तब तक पन्ना टाइगर रिजर्व का प्रबंधन सवालों के घेरे में बना हुआ है।