पीएम किसान योजना के तहत केंद्र सरकार केवल उन्हीं किसानों को लाभ देती है जिनके पास खेती योग्य जमीन का स्वामित्व दस्तावेजों सहित मौजूद होता है। जिन किसानों के नाम पर जमीन दर्ज नहीं है, या जिनकी खेती पट्टे अथवा अनौपचारिक व्यवस्था पर चल रही है, वे योजना की पात्रता शर्तों से बाहर हो जाते हैं। इसी कारण बड़ी संख्या में किसान 22वीं किस्त का लाभ नहीं ले पाएंगे और उनके खाते में 2-2 हजार रुपये नहीं आएंगे।
ई-केवाईसी पूरी न होने से भी रोका जा सकता है भुगतान
सरकार ने पीएम किसान योजना में लाभार्थियों की पहचान को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए ई-केवाईसी को अनिवार्य किया है। लाखों किसानों ने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, जिसके चलते उनकी किस्तें पिछली बार की तरह इस बार भी रुक सकती हैं। ई-केवाईसी न होने पर किसान का रिकॉर्ड अधूरा माना जाता है और भुगतान स्वतः प्रणाली द्वारा रोक दिया जाता है।
आधार-बैंक लिंक न होना बनी प्रमुख समस्या
किसानों को मिलने वाली किस्त सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है। कई किसानों के बैंक खाते अभी भी आधार नंबर से लिंक नहीं हैं, जिसके कारण सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती। आधार लिंकिंग न होने पर बैंक भुगतान को अस्वीकार कर देता है और किस्त लंबित रह जाती है। इस कमी को दूर किए बिना किसानों को अगली किस्त मिलना संभव नहीं है।
नए किसानों के लिए फार्मर आईडी की अनिवार्यता
सरकार ने नए पंजीकरण के साथ एक और महत्वपूर्ण शर्त लागू की है, जिसके तहत अब नए किसानों को लाभ प्राप्त करने के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य होगी। यह आईडी किसान की पहचान, जमीन, बैंक और आधार विवरण का केंद्रीकृत प्रमाण होगी। जिन नए किसानों ने फार्मर आईडी नहीं बनाई है, उनके आवेदन अधूरे माने जाएंगे और उन्हें योजना के तहत भुगतान जारी नहीं हो सकेगा।
22वीं किस्त से पहले जरूरी सुधार पूरे करने की अपील
सरकार समय–समय पर किसानों को अपनी जानकारी अपडेट करने और आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराने की अपील करती रही है। यदि किसान आधार लिंकिंग, ई-केवाईसी, बैंक खाते की जानकारी और जमीन संबंधी दस्तावेज जल्द पूरा कर दें, तो अटकी हुई किस्त प्राप्त करने में सुविधा होगी। 22वीं किस्त जारी होने से पहले प्रक्रियाओं को पूरा करना उन किसानों के लिए बेहद जरूरी है जिनका भुगतान रुकने की आशंका है।
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