नई दिल्ली. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत 2019 में किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। योजना के तहत पात्र किसानों को हर 4 महीने में 2,000 रुपये की किस्त दी जाती है और इस तरह सालभर में कुल 6,000 रुपये सीधे बैंक खाते में पहुंचाए जाते हैं। भुगतान की यह व्यवस्था प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए संचालित होती है, जिससे राशि सीधे लाभार्थी के खाते तक पहुंचती है। बीते वर्षों में इस योजना का दायरा काफी बड़ा हुआ है और करोड़ों किसान इसके लाभार्थी बने हैं। अब सूचना के अधिकार के जरिए सामने आए आंकड़ों ने योजना के बजट और वास्तविक खर्च के बीच के अंतर को लेकर नई जानकारी सामने रखी है।
7 साल में 4 बार पूरा बजट नहीं हो सका खर्च
आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक प्रधानमंत्री किसान योजना में सरकार की ओर से आवंटित बजट और वास्तविक खर्च हर साल एक जैसा नहीं रहा। योजना लागू होने के बाद ऐसे 4 साल रहे, जब बजट में निर्धारित पूरी राशि खर्च नहीं हो सकी। इसके पीछे प्रमुख कारण लाभार्थियों की संख्या में बदलाव और पात्रता के सत्यापन के दौरान कुछ नामों का हटना बताया गया है। कई किसानों द्वारा योजना की निर्धारित शर्तें पूरी नहीं किए जाने या सत्यापन प्रक्रिया में अपात्र पाए जाने के कारण लाभार्थियों की संख्या प्रभावित हुई। ऐसे में सरकार की ओर से उपलब्ध कराया गया पूरा बजट खर्च नहीं हो पाया और आवंटित राशि तथा वास्तविक भुगतान के बीच अंतर दिखाई दिया।
3 साल बजट से ज्यादा हुआ खर्च
दूसरी ओर, आंकड़ों में ऐसे 3 साल भी सामने आए जब योजना पर किया गया खर्च बजट में शुरुआती तौर पर निर्धारित राशि से अधिक रहा। इसका प्रमुख संबंध लाभार्थियों की संख्या बढ़ने से जोड़ा गया है। जैसे-जैसे अधिक किसान योजना के दायरे में शामिल हुए, सरकार पर किस्तों के भुगतान का वित्तीय भार भी बढ़ता गया। योजना में पात्र किसानों को निर्धारित समय पर राशि पहुंचाने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है। इसका अर्थ यह है कि खर्च में होने वाला बदलाव केवल बजट आवंटन से नहीं, बल्कि वास्तविक लाभार्थियों की संख्या और उनकी पात्रता के आधार पर किए गए भुगतान से भी जुड़ा है।
लाभ पाने के लिए सत्यापन और ई-केवाईसी जरूरी
प्रधानमंत्री किसान योजना की अगली किस्त का लाभ लेने वाले किसानों के लिए अपनी जानकारी सही और अद्यतन रखना बेहद महत्वपूर्ण है। ई-केवाईसी, भूमि संबंधी सत्यापन और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने पर किस्त अटक सकती है। कई मामलों में बैंक खाते से संबंधित जानकारी, आधार से जुड़ी त्रुटि या भूमि रिकॉर्ड के सत्यापन में समस्या के कारण भुगतान में रुकावट आ सकती है। इसलिए लाभार्थियों को अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय अपनी सभी जरूरी प्रक्रियाएं पहले ही पूरी कर लेनी चाहिए। इससे पात्र किसान के खाते में किस्त पहुंचने के दौरान अनावश्यक तकनीकी या दस्तावेजी परेशानी की संभावना कम हो सकती है।
24वीं किस्त को लेकर किसानों का इंतजार
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23 किस्तें जारी होने के बाद अब लाभार्थी किसानों की नजर 24वीं किस्त पर टिकी हुई है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसके नवरात्रि के आसपास जारी होने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन अभी तक केंद्र सरकार की ओर से 24वीं किस्त की निश्चित तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए संभावित तारीख को अंतिम मानना उचित नहीं होगा। किसानों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी यह है कि वे अपनी पात्रता और जरूरी सत्यापन प्रक्रियाओं को पूरा रखें, ताकि आधिकारिक तौर पर किस्त जारी होने के बाद भुगतान में किसी तरह की बाधा न आए।
बजट और भुगतान के आंकड़े क्या बताते हैं
आरटीआई से सामने आया 7 साल का रुझान यह संकेत देता है कि इतनी बड़ी किसान कल्याण योजना में बजट का वास्तविक उपयोग लाभार्थियों की संख्या और पात्रता सत्यापन से सीधे प्रभावित होता है। जिन वर्षों में लाभार्थियों की संख्या कम हुई, वहां आवंटित राशि का पूरा इस्तेमाल नहीं हो सका, जबकि लाभार्थियों के बढ़ने पर सरकार का वास्तविक खर्च बजट अनुमान से आगे निकल गया। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि योजना का वित्तीय आकार स्थिर नहीं है और पात्र किसानों की संख्या के अनुसार इसमें बदलाव होता रहता है। आने वाले समय में डिजिटल सत्यापन, भूमि रिकॉर्ड और ई-केवाईसी जैसी व्यवस्थाएं यह तय करने में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं कि सहायता राशि सही और पात्र किसानों तक समय पर पहुंच सके।