नई दिल्ली. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस भारतीय कैप्टन से वीडियो कॉल पर बातचीत की जिन्होंने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई विमान में अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया। इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद 174 से अधिक यात्रियों और क्रू सदस्यों की जान बचाने वाले उनके अदम्य साहस की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कैप्टन स्मित के जल्द स्वस्थ होने की कामना व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा देश उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थना कर रहा है। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्मित ने साबित कर दिया है कि हिंदुस्तानी किसी की जान लेने वाले नहीं बल्कि जान बचाने वाले लोग हैं। उन्होंने उनकी बहादुरी, सूझबूझ और मुश्किल वक्त में धैर्य बनाए रखने की विशेष सराहना की। प्रधानमंत्री ने हृदय से गर्व का अनुभव करते हुए कहा कि स्मित ने चंद सेकंड में निर्णय लेकर इतने लोगों की जान बचा ली और अपने शरीर पर इतने बड़े घाव लेकर भी खुद की परवाह किए बिना लोगों की चिंता की तथा 140 करोड़ देशवासियों का मान रखा।
स्मित की बहादुरी और सूझबूझ की सराहना
प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान बार-बार इस बात पर जोर दिया कि कैप्टन स्मित ने जीवन और मृत्यु की परवाह किए बिना विमान में सवार सभी लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर घावों के बावजूद स्मित ने जो हिम्मत दिखाई वह न केवल व्यक्तिगत साहस का उदाहरण है बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि मुश्किल परिस्थितियों में भी धैर्य न खोने और सही निर्णय लेने की क्षमता ने ही इतनी बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की। उन्होंने स्मित से कहा कि उनका यह कृत्य देशवासियों के मन में गौरव की भावना जगाता है और पूरी दुनिया में भारतीय पायलट की छवि को और मजबूत करता है। बातचीत के हर पल में प्रधानमंत्री के शब्दों में गर्व और आत्मीयता दोनों झलक रहे थे। उन्होंने स्मित को आश्वस्त किया कि जरूरत पड़ने पर वे मात्र एक फोन कॉल दूर हैं और हर संभव सहायता उपलब्ध रहेगी।
भावुक हो गए कैप्टन स्मित
प्रधानमंत्री से बात करते समय कैप्टन स्मित मच्छार बेहद भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से बात करना उनके जीवन का बहुत खास पल है। स्मित ने स्पष्ट शब्दों में बताया कि प्रधानमंत्री उनके सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत रहे हैं और इस बातचीत से उन्हें अपार गर्व महसूस हो रहा है। आंखों में आंसू लिए उन्होंने विमान के अंदर की पूरी आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि उस वक्त वे अपनी जिंदगी के लिए लड़ रहे थे और इतने घाव लगे थे कि वे गिर चुके थे। लेकिन उसी पल उन्होंने सोचा कि अगर अभी नहीं उठे तो कुछ भी हो सकता है। गिरने के बाद उन्हें अहसास हो गया था कि विमान नीचे जा रहा है। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत जुटाई, उठे और कॉकपिट का दरवाजा खोला। इसके बाद बाकी लोग आए और स्थिति पर नियंत्रण संभव हो सका। आपबीती सुनाते हुए स्मित की आवाज में भावनाएं साफ झलक रही थीं और उनकी आंखें नम हो गई थीं।
मुश्किल वक्त में हनुमान चालीसा का पाठ
स्मित ने प्रधानमंत्री को बताया कि जब भी वे किसी मुश्किल परिस्थिति में होते हैं तो हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। फ्लाईदुबई विमान में हुई उस बेहद गंभीर घटना के दौरान भी वे लगातार हनुमान चालीसा का जाप कर रहे थे। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि उस वक्त वे सिर्फ हनुमान चालीसा ही पढ़ रहे थे और उन्हें पूरा विश्वास है कि भगवान ने ही उन्हें बचाया। मुश्किल से मुश्किल क्षण में भी आध्यात्मिक शक्ति का सहारा लेकर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इस बात ने प्रधानमंत्री को भी गहराई से प्रभावित किया। स्मित के अनुसार वही जाप उनके मन में शक्ति और संकल्प भरता रहा जिसने उन्हें घायल अवस्था में भी उठने और दरवाजा खोलने की प्रेरणा दी। यह बात न केवल व्यक्तिगत आस्था का परिचय देती है बल्कि संकट के समय में आध्यात्मिक बल की महत्ता को भी रेखांकित करती है।
माँ का जिक्र और हर संभव मदद का आश्वासन
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान स्मित की माता गीता बेन का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी माता ने उन्हें भगवद्गीता के मूल्यों और शिक्षाओं के साथ बड़ा किया है। इन्हीं मूल्यों ने स्मित को मुश्किल समय में सही दिशा दिखाई। प्रधानमंत्री ने स्मित से स्पष्ट कहा कि उन्हें किसी भी तरह की मदद की जरूरत हो तो वे बस एक फोन कॉल दूर हैं। उन्होंने परिवार से भी पहले बात की थी और स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। इस आश्वासन ने स्मित को और भी भावुक कर दिया। प्रधानमंत्री के शब्दों में स्मित और उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना और समर्थन साफ झलक रहा था। उन्होंने दोहराया कि पूरा देश उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहा है।
विमान को क्रैश होने से बचाने की पूरी घटना
फ्लाईदुबई की उस उड़ान में कॉकपिट के अंदर हुए हमले में स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए थे। को-पायलट विमान को क्रैश करना चाहता था और उसने स्मित पर विमान में मौजूद कुल्हाड़ी से कई वार किए। खून से लथपथ होने के बावजूद स्मित ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोला। इसके बाद क्रू सदस्यों और कुछ यात्रियों ने को-पायलट को पकड़ा तथा विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। स्मित के इस एक कदम ने ही सैकड़ों जानें बचाईं। घटना के दौरान उन्होंने न केवल अपनी जान की परवाह नहीं की बल्कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा। उनकी सूझबूझ और हिम्मत के कारण विमान सुरक्षित उतर सका और एक बड़ी त्रासदी टल गई। यह घटना भारतीय पायलट की बहादुरी का जीवंत उदाहरण बन गई है।