केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि देश के हर राज्य को अपनी जलवायु और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग रणनीति बनानी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि “वन-साइज-फिट्स-ऑल” मॉडल से खेती में अपेक्षित सुधार संभव नहीं है। लखनऊ में आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि भारत जैसे विविध जलवायु वाले देश में क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार कृषि नीति तैयार करना ही भविष्य की दिशा है।
यूपी की उपलब्धि, लेकिन चुनौतियां भी कायम
चौहान ने Yogi Adityanath के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को खाद्यान्न उत्पादन में देश का नंबर वन राज्य बताया। उन्होंने कहा कि यूपी ने कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन इसके साथ ही कई चुनौतियां भी सामने हैं। उन्होंने कहा कि अब भारत को खाद्यान्न के लिए किसी अन्य देश पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है, बल्कि निर्यात बढ़ाने की दिशा में काम करना होगा। वर्तमान में देश करीब 25 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का निर्यात कर रहा है।
तीन बड़े लक्ष्य: खाद्य सुरक्षा, आय और पोषण
कृषि मंत्री ने आगे की रणनीति स्पष्ट करते हुए तीन प्रमुख लक्ष्यों पर जोर दिया:
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना
किसानों की आय बढ़ाना
पोषण स्तर में सुधार करना
उन्होंने कहा कि इन तीनों बिंदुओं पर केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा, तभी कृषि क्षेत्र में स्थायी सुधार संभव है।
बीज, मिट्टी और विविधीकरण पर फोकस
चौहान ने कहा कि कृषि में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका बीज की होती है। जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए किसानों को बेहतर और अनुकूल बीज उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने जानकारी दी कि Indian Council of Agricultural Research (ICAR) ने अब तक 3400 नई फसलों की किस्में विकसित की हैं, जो भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मदद करेंगी। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि पंजाब जैसे राज्यों में मिट्टी की सेहत खराब हो रही है, जिससे सबक लेकर संतुलित खेती और कृषि विविधीकरण को अपनाना होगा।
नकली खाद-पेस्टीसाइड पर सख्ती
केंद्रीय मंत्री ने नकली खाद और कीटनाशकों के बढ़ते खतरे को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ सख्त कानून लाए जा रहे हैं और राज्यों को इस पर अभियान चलाना होगा ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
कृषि रोडमैप और वैज्ञानिकों की भूमिका
चौहान ने कहा कि हर राज्य को अपना “कृषि रोडमैप” तैयार करना चाहिए। देश में मौजूद करीब 16 हजार कृषि वैज्ञानिकों को “लैब से लैंड” तक पहुंचना होगा, ताकि किसानों को सीधे लाभ मिल सके। उन्होंने “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का जिक्र करते हुए कहा कि वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर किसानों की समस्याओं का समाधान करें।
फार्मर रजिस्ट्री और KCC पर जोर
कृषि मंत्री ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री का काम जारी है और इससे किसानों को 16 प्रकार के लाभ मिलेंगे। साथ ही उन्होंने राज्यों से अपील की कि हर किसान का किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।