प्रभु श्रीराम के लिए विशेष रूप से निर्मित स्वर्ण धनुष की यात्रा ओडिशा के राउरकेला स्थित हनुमान वाटिका से आरंभ हुई है। सनातन जागरण मंच (स्माइल फॉरएवर फाउंडेशन) द्वारा आयोजित यह यात्रा कई जिलों से गुजरते हुए अयोध्या पहुंचेगी। शनिवार को सुंदरगढ़ पहुंची यह यात्रा श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
कब और कैसे पहुंचेगा स्वर्ण धनुष अयोध्या
आयोजकों के अनुसार यह धार्मिक यात्रा 19 जनवरी को पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ धाम से आगे प्रस्थान करेगी और 22 जनवरी को अयोध्या पहुंचकर संपन्न होगी। अयोध्या में इस भव्य स्वर्ण धनुष को श्रीराम मंदिर में रामलला को विधिवत समर्पित किया जाएगा, जहां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इसका स्वागत किया जाएगा।
आकार और वजन से बना विशेष आकर्षण
यह स्वर्ण धनुष अपने भव्य आकार और विशाल वजन के कारण श्रद्धालुओं और दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इसकी लंबाई आठ फीट और चौड़ाई तीन फीट है, जबकि कुल वजन 286 किलोग्राम है। अपने विराट स्वरूप के कारण यह धनुष शोभायात्रा का प्रमुख केंद्र बिंदु बना हुआ है।
पंचधातु से निर्मित अनोखी संरचना
स्वर्ण धनुष के निर्माण में विभिन्न धातुओं का प्रयोग किया गया है। इसमें 240 किलोग्राम तांबा, 22 किलोग्राम लोहा, 20 किलोग्राम अभ्रक, 2.5 किलोग्राम चांदी और एक किलोग्राम सोने का उपयोग किया गया है, जिसे 10 माइक्रॉन गोल्ड प्लेटिंग के रूप में लगाया गया है। यह पंचधातु से निर्मित है, जो इसे धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष बनाता है।
महिला शिल्पकारों की अद्भुत कारीगरी
इस भव्य धनुष को तमिलनाडु के कांचीपुरम की 40 महिला शिल्पकारों ने तैयार किया है। यह कृति उनके समर्पण, कौशल और पारंपरिक शिल्प की जीवंत मिसाल है। धनुष पर भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा और चांदी का जड़ाऊ मुकुट भी स्थापित किया गया है, जो इसकी आध्यात्मिक भव्यता को और बढ़ाता है।
धार्मिक आस्था के साथ राष्ट्रीय गौरव का संदेश
स्वर्ण धनुष पर भारत की प्रमुख सैन्य उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया है। करगिल युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक की झलक इस धनुष पर अंकित है, जो इसे केवल धार्मिक प्रतीक ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय गौरव का भी प्रतिनिधि बनाती है।
अयोध्या में होगा विधिवत अभिषेक
सनातन जागरण मंच के संयोजक संतोष बिस्वाल ने बताया कि अयोध्या पहुंचने पर स्वर्ण धनुष, भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा और चांदी के मुकुट का श्रीराम मंदिर में विधिवत अभिषेक किया जाएगा। इस अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न होंगे।
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