तमिलनाडु में राजनीतिक दलों ने आगामी विधानसभा चुनाव एक चरण में कराने का प्रस्ताव रखा है। इस पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त तमिलनाडु ने चेन्नई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आयोग इस सुझाव का गंभीरता से मूल्यांकन करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव कितने चरण में होंगे, इसका निर्णय गहन तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था जैसे कई कारकों को ध्यान में रखते हुए ही लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही यह स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को मिली बड़ी सफलता
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने हाल ही में संपन्न विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को बेहद सफल और पारदर्शी बताया। राजनीतिक दलों द्वारा मतदाता नाम हटाए जाने की आलोचना पर उन्होंने कहा कि SIR का मूल उद्देश्य मतदाता सूची की शुचिता बनाए रखना है ताकि कोई अयोग्य व्यक्ति सूची में न रहे और कोई योग्य नागरिक बाहर न छूटे। उन्होंने इसे चुनावी मशीनरी की पेशेवर क्षमता का प्रमाण बताया।
बिहार मॉडल से भी बेहतर चुनाव कराने की तैयारी
कुमार ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और प्रवर्तन एजेंसियों ने आश्वस्त किया है कि तमिलनाडु का चुनाव व्यवस्था के मामले में अब तक का सबसे उत्कृष्ट चुनाव साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके अनुभव में बिहार के पिछले चुनाव बेहद त्रुटिरहित रहे हैं, लेकिन तमिलनाडु का चुनाव उससे भी बेहतर मानक स्थापित कर सकता है।
मतदान केंद्रों पर बेहतर सुविधाओं का आश्वासन
कुमार ने कहा कि राज्य के लगभग 75,000 मतदान केंद्रों पर सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु में मतदान हमेशा उत्साहपूर्ण और राजनीतिक चेतना के साथ होता रहा है, और आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर मतदाता सुगमता से वोट डाल सके।
एक चरण में चुनाव कराने की चुनौती और संभावनाएँ
एक चरण का चुनाव प्रशासनिक और सुरक्षा प्रबंधन की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन राजनीतिक दलों के प्रस्ताव को देखते हुए निर्वाचन आयोग सभी संभावनाओं का आकलन कर रहा है। आयोग की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित हों। यदि सभी मानकों पर यह सुझाव उपयुक्त पाया गया, तो यह राज्य के निर्वाचन इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।
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