फाल्गुन मास के रंगों, मादल की थाप और जीवन-प्रेम की उमंग से सराबोर भगोरिया पर्व जनजातीय संस्कृति, सामाजिक स्नेह और परंपरागत जीवन मूल्यों का जीवंत उत्सव है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज उदयगढ़ के इस जनजातीय लोक पर्व में शामिल हुए।
उत्सव का वातावरण
पर्व स्थल पर पारंपरिक लोकधुनों, नृत्य और उल्लासपूर्ण वातावरण ने सम्पूर्ण क्षेत्र को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया। युवा-युवतियां रंग-बिरंगी पारंपरिक वेषभूषा में सज-धज कर लोकनृत्य कर रहे थे। पुरुष पारंपरिक धोती, अंगोछा और साफा में दिखाई दिए, जबकि महिलाएं कांचली, घाघरा, ओढ़नी और कढ़ाईयुक्त परिधानों में सुसज्जित रहीं। चांदी के हार, हांसली, कड़े, पायल, बिछिया और अन्य पारंपरिक आभूषणों की झंकार ने उत्सव की शोभा बढ़ाई।
लोकनृत्य और संगीत
मादल, ढोल और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर कुर्ता-कुर्राटियों के साथ लोकनृत्य करते जनजातीय समाज ने सामूहिक उल्लास और आपसी मेल-जोल का अद्भुत प्रदर्शन किया। इस समागम ने भगोरिया के माहौल को जीवंत और स्मरणीय बना दिया।
मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगोरिया पर्व जनजातीय संस्कृति, प्रेम और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने भगोरिया को राष्ट्रीय पर्व के समान मनाने की भी घोषणा की।
संस्कृति और विरासत का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस उत्सव के माध्यम से विरासत को विकास की राह पर ले जाने का संकल्प दर्शाया जा रहा है। यह आयोजन जनजातीय संस्कृति की सशक्त पहचान और राज्य सरकार की संवेदनशील सोच को प्रतिबिंबित करता है।
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