कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस अब अंदरूनी कलह की आग में जल रही है। शनिवार रात पार्टी के संसदीय पदों की घोषणा के बाद 'उत्तर कोलकाता बनाम दक्षिण कोलकाता' का पुराना विवाद एक बार फिर हिंसक रूप ले चुका है।
दक्षिण का दबदबा, उत्तर में गुस्सा
नई नियुक्तियों में नेता प्रतिपक्ष के रूप में बालीगंज के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय और मुख्य सचेतक (Chief Whip) के रूप में फिरहाद हकीम को चुना गया है। ये दोनों ही नेता दक्षिण कोलकाता से आते हैं। इसके अलावा डिप्टी लीडर के पद पर नयना बनर्जी (चौरंगी) और असीमा पात्रा को जगह दी गई है। उत्तर कोलकाता के नेताओं का आरोप है कि ममता बनर्जी का 'दक्षिण प्रेम' पार्टी को ले डूबेगा।
व्हाट्सएप ग्रुप में 'जुबानी जंग'
विवाद उस समय और गहरा गया जब उत्तर कोलकाता के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में पार्टी के दिग्गज नेता सुदीप बनर्जी और पार्षद सुब्रत बनर्जी के बीच तीखी बहस हुई। सुब्रत बनर्जी ने सुदीप को 'उत्तर कोलकाता का अघोषित सम्राट' बताते हुए पद छोड़ने की सलाह दी।इस पर सांसद सुदीप बनर्जी ने अपना आपा खो दिया और प्रतिक्रिया में लिखा, "हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार।" अपनी ही पार्टी के पार्षद को 'कुत्ता' कहे जाने पर सुब्रत बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा, "जो अपने ही पार्षद को कुत्ता कहता है, वह भूल रहा है कि वह उसी कुत्ते का चेयरमैन है।"
उत्तर कोलकाता में ढहा TMC का किला
एक समय उत्तर कोलकाता की सभी सात सीटें TMC के पास थीं, लेकिन इस बार मानिकतला, जोड़ासाँको, श्यामपुकुर और काशीपुर-बेलगाछिया जैसी सीटों पर पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सुदीप बनर्जी केवल अपनी पत्नी नयना बनर्जी को पद दिलाने में व्यस्त हैं और संकट के समय जमीन पर मौजूद नहीं रहते।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह असंतोष जल्द नहीं थमा, तो उत्तर कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बड़ी टूट अनिवार्य है।