कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की राजनीति में प्रशासनिक तबादलों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कल्याण बनर्जी ने चुनाव आयोग के बड़े पैमाने पर किए गए ट्रांसफर आदेशों के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है।
सोमवार को उन्होंने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुजय पॉल की खंडपीठ के समक्ष जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने याचिका दाखिल करने की इजाजत दे दी है और इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है।
क्या है पूरा मामला?
चुनाव आयोग ने हाल ही में राज्यभर में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए एक ही दिन में 267 अधिकारियों का तबादला कर दिया। इसमें 173 थानों के प्रभारी अधिकारियों सहित 184 पुलिसकर्मी और 18 जिलों के 83 ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) शामिल हैं।
इसके अलावा एक सहायक रिटर्निंग अधिकारी को भी स्थानांतरित किया गया है। चुनावी माहौल के बीच इतने बड़े पैमाने पर तबादलों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
टीएमसी का आरोप
टीएमसी का कहना है कि ये ट्रांसफर प्रशासनिक जरूरत नहीं, बल्कि राजनीतिक मंशा से किए गए हैं। पार्टी का दावा है कि इससे सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है और चुनावी प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।
केंद्र का जवाब
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनावी राज्यों में इस तरह के तबादले सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।
पहले भी उठ चुका है मामला
गौरतलब है कि 15 मार्च को चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई थी। उसी दिन से चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक, जिला मजिस्ट्रेट और विभिन्न जिलों के पुलिस अधीक्षकों सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले शुरू कर दिए थे।
इसके खिलाफ कल्याण बनर्जी पहले भी 20 मार्च को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं।