कोलकाता/हावड़ा: पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही अब वर्षों से चली आ रही 'तोलाबाजी' (जबरन वसूली) के खिलाफ आवाजें बुलंद होने लगी हैं। हावड़ा-दीघा बस स्टैंड के बस मालिकों ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार से राज्य में जारी अवैध वसूली को तुरंत बंद करने की अपील की है।
क्या है पूरा मामला?
हावड़ा स्टेशन स्थित हावड़ा-दीघा बस स्टैंड से लगभग 200 से 220 बसें दीघा, मेदिनीपुर और दक्षिण बंगाल के विभिन्न हिस्सों के लिए चलती हैं। बस मालिकों का गंभीर आरोप है कि सालों से यहाँ बस संगठनों और श्रमिक यूनियनों के नाम पर अवैध तरीके से पैसे वसूले जा रहे हैं।
वसूली का गणित: रसीद 50 की, वसूली 280 की
बस मालिकों के अनुसार, स्टैंड पर बस खड़ी करने के बदले प्रत्येक मालिक से प्रतिदिन 250 से 280 रुपये वसूले जाते हैं, जबकि रसीद मात्र 50 रुपये की दी जाती है। इतना ही नहीं, यदि बाहर से कोई नई बस स्टैंड पर आती है, तो उससे एंट्री के नाम पर लाखों रुपये की मांग की जाती है। पैसे न देने पर बस चालकों और मालिकों के साथ मारपीट और धमकी दी जाती है।
2008 से जारी है आतंक
'ऑल बंगाल बस मिनीबस समन्वय समिति' के महासचिव राहुल चटर्जी ने कहा, "2008 से विभिन्न राजनीतिक दलों के श्रमिक संगठनों के नाम पर यह खेल चल रहा है। इस भारी वसूली के कारण अब बस व्यवसाय चलाना मुश्किल हो गया है। अगर यह बंद नहीं हुआ, तो हमें सेवाएं रोकनी पड़ेंगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था ठप हो जाएगी।"
नई सरकार से 'असली परिवर्तन' की उम्मीद
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेतृत्व ने 'तोलाबाजी' मुक्त बंगाल और 'असली परिवर्तन' का वादा किया था। अब सत्ता में आने के बाद, बस मालिकों को उम्मीद है कि शुभेंदु अधिकारी की सरकार इस सिंडिकेट राज को खत्म कर उन्हें न्याय दिलाएगी।