पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 23 अप्रैल को हुए मतदान ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। राज्य की 152 सीटों पर हुए इस चरण में 92 प्रतिशत से अधिक वोटिंग दर्ज की गई, जो 2011 के बाद अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा माना जा रहा है। कई क्षेत्रों में मामूली घटनाओं के बावजूद मतदाताओं का उत्साह देखने लायक रहा और कुल मतदान प्रतिशत 92.9 तक पहुंच गया, जो आजादी के बाद के चुनावों में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
SIR प्रक्रिया के बाद पहला बड़ा चुनाव, लाखों नाम मतदाता सूची से हटे
यह चुनाव विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद कराया गया पहला बड़ा मतदान है। चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए इस अभियान में राज्य में करीब 11.63 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए थे, जिनकी संख्या लगभग 91 लाख बताई गई है। इनमें से करीब 58 लाख नाम ड्राफ्ट सूची के दौरान ही हटा दिए गए थे। इसके बावजूद मतदान में भारी भागीदारी ने लोकतंत्र को लेकर लोगों की सक्रियता को दर्शाया है।
कुछ सीटों पर रिकॉर्ड मतदान, सीमांचल क्षेत्रों में जबरदस्त भागीदारी
मुर्शिदाबाद जिले की समसेरगंज सीट पर सबसे अधिक 96.03 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इसी तरह लालगोला में 96.45 प्रतिशत, भगवानगोला में 96.95 प्रतिशत, रघुनाथगंज में 96.9 प्रतिशत और फरक्का में 96.05 प्रतिशत वोटिंग हुई। ये सभी वे क्षेत्र हैं जहां मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए थे, फिर भी यहां लोगों ने बड़ी संख्या में मतदान किया।
महिला मतदाताओं की बड़ी भागीदारी, पुरुषों से आगे रही
इस चरण में महिलाओं ने भी मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 92.69 रहा, जबकि पुरुषों का 90.92 प्रतिशत दर्ज किया गया। आंकड़े बताते हैं कि इस बार महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पहले की तुलना में और अधिक मजबूत हुई है।
SIR पर राजनीतिक घमासान, विपक्ष ने उठाए सवाल
SIR प्रक्रिया को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद भी देखने को मिला। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे मतदाता सूची में बड़ी छंटनी करार दिया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे अलग नजरिए से देखते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया को राजनीतिक रूप से प्रभावित बताया।
TMC का दावा, जनता ने लोकतंत्र के समर्थन में किया मतदान
मतदान समाप्त होने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि भारी मतदान यह दिखाता है कि लोग अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर सजग हैं। पार्टी का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर वोटिंग यह संकेत देती है कि जनता किसी भी तरह की राजनीतिक रणनीति से प्रभावित हुए बिना लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले रही है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज, आगे के चरणों पर टिकी नजरें
मतदान के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। जहां सत्ताधारी दल इसे जनता का समर्थन बता रहा है, वहीं विपक्षी खेमे से सरकार पर निशाना साधा जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रतिक्रिया भी सामने आई है, जिसमें उन्होंने राज्य की राजनीतिक स्थिति में बदलाव के संकेत दिए हैं। अब सभी की नजरें आने वाले चरणों के मतदान पर टिकी हैं, जो बंगाल की सियासत की दिशा तय कर सकते हैं।