नई दिल्ली. देश में गेहूं उत्पादन पर इस वर्ष मौसम की मार स्पष्ट दिखाई दे रही है। अल नीनो के प्रभाव और बेमौसम बारिश के कारण फसल प्रभावित हुई है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के अनुसार फसल वर्ष 2025-26 में गेहूं उत्पादन 11 से 12 करोड़ टन के बीच रहने की संभावना है, जो पहले के अनुमान से लगभग 1 करोड़ टन कम है। यह गिरावट कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन गई है।
उत्पादन अनुमान में आई उल्लेखनीय कमी
पूर्व में कृषि मंत्रालय ने गेहूं उत्पादन 12 करोड़ टन से अधिक रहने का अनुमान जताया था, लेकिन मौसम में आई अचानक खराबी ने इन अनुमानों को प्रभावित कर दिया। अब उद्योग संगठनों के आकलन भी लगभग 11 करोड़ टन के आसपास सिमट गए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि उत्पादन में अपेक्षित वृद्धि फिलहाल स्थिर हो गई है और कृषि क्षेत्र को संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
प्रमुख उत्पादक राज्यों में फसल को नुकसान
मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसल को व्यापक नुकसान हुआ है। इन राज्यों में कटाई के समय आई मौसमीय बाधाओं ने उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों को प्रभावित किया है। किसानों के लिए यह स्थिति आर्थिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
सरकारी खरीद नीति में किया गया संशोधन
वर्तमान स्थिति को देखते हुए सरकार ने गेहूं खरीद लक्ष्य को बढ़ाकर 3.45 करोड़ टन कर दिया है। अब तक लगभग 1.64 करोड़ टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों में खरीद के लक्ष्य बढ़ाए गए हैं और नियमों में कुछ लचीलापन भी प्रदान किया गया है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो।
निर्यात और घरेलू बाजार पर संतुलन की कोशिश
सरकार ने चरणबद्ध तरीके से 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दी है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के अंतर के कारण निर्यात की गति अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। इस स्थिति में सरकार घरेलू बाजार में कीमतों को संतुलित बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
कीमत नियंत्रण के लिए नई नीति की तैयारी
घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार जल्द ही खुले बाजार में बिक्री की नई नीति लागू करने की तैयारी कर रही है। इस नीति का उद्देश्य आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराना और कीमतों में अचानक वृद्धि को रोकना है। इससे उपभोक्ताओं और बाजार दोनों को स्थिरता मिलने की उम्मीद है।