हर वर्ष 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को सुरक्षित भोजन के महत्व के प्रति जागरूक करना है। आधुनिक जीवनशैली में जहां पैक्ड फूड, बाहर का भोजन और त्वरित खानपान बढ़ा है, वहीं खाद्य जनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी सुरक्षित तैयारी, भंडारण और उपयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कई बार हमारी छोटी-सी लापरवाही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।
क्या सिर्फ देखकर या सूंघकर पता चल जाता है कि खाना खराब है?
बहुत से लोग मानते हैं कि यदि भोजन से दुर्गंध नहीं आ रही और उसका रंग सामान्य दिखाई दे रहा है तो वह पूरी तरह सुरक्षित है। वास्तविकता इससे अलग है। अनेक प्रकार के हानिकारक जीवाणु और विषाणु भोजन के स्वाद, रंग या गंध में कोई बदलाव नहीं करते। ऐसे में भोजन देखने में पूरी तरह सामान्य लग सकता है, लेकिन उसके भीतर संक्रमण मौजूद हो सकता है। यही कारण है कि केवल इंद्रियों के भरोसे भोजन की सुरक्षा का निर्णय लेना जोखिम भरा हो सकता है।
बचे हुए भोजन को फ्रिज में रखना कितना जरूरी है?
घरों में अक्सर बचा हुआ भोजन कई घंटों तक बाहर रखा रहता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पका हुआ भोजन यदि दो घंटे से अधिक समय तक सामान्य तापमान पर रखा जाए तो उसमें जीवाणुओं की वृद्धि तेजी से शुरू हो सकती है। इसलिए बचा हुआ भोजन हमेशा स्वच्छ और वायुरुद्ध डिब्बों में बंद करके शीतकक्ष में रखना चाहिए। सही तरीके से संग्रहित भोजन न केवल अधिक समय तक सुरक्षित रहता है बल्कि खाद्य विषाक्तता के खतरे को भी कम करता है।
क्या वास्तव में काम करता है ‘पांच सेकंड नियम’?
लोकप्रिय धारणा है कि यदि कोई खाद्य पदार्थ जमीन पर गिर जाए और उसे पांच सेकंड के भीतर उठा लिया जाए तो वह सुरक्षित रहता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह धारणा गलत साबित हुई है। किसी भी सतह पर मौजूद सूक्ष्म जीव भोजन के संपर्क में आते ही उस पर चिपक सकते हैं। संक्रमण होने में कई सेकंड का इंतजार नहीं करना पड़ता। इसलिए जमीन पर गिरा भोजन खाने से बचना ही स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है।
फूड पॉइजनिंग के लक्षण कब तक सामने आ सकते हैं?
कई लोग यह मानते हैं कि यदि भोजन से समस्या हुई होगी तो उसके लक्षण कुछ ही घंटों में दिखाई देंगे। जबकि वास्तविकता यह है कि विभिन्न प्रकार के जीवाणु और विषाणु अलग-अलग समय पर प्रभाव दिखाते हैं। कुछ मामलों में लक्षण कुछ घंटों में दिखाई देते हैं तो कुछ में कई दिन या सप्ताह भी लग सकते हैं। यही कारण है कि फूड पॉइजनिंग के स्रोत की पहचान करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
फ्रोजन फूड को कमरे के तापमान पर रखना कितना सुरक्षित?
जमी हुई खाद्य सामग्री को जल्दी पिघलाने के लिए उसे बाहर रख देना एक सामान्य आदत है, लेकिन खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ इसे खतरनाक मानते हैं। ऐसा करने पर भोजन की बाहरी सतह तेजी से गर्म हो जाती है, जहां जीवाणुओं को पनपने का अवसर मिल जाता है, जबकि अंदरूनी हिस्सा अब भी जमा हुआ रहता है। सुरक्षित तरीका यह है कि खाद्य पदार्थों को शीतकक्ष में धीरे-धीरे पिघलाया जाए या नियंत्रित तापमान वाले पानी का उपयोग किया जाए।
क्या ऑर्गेनिक फल और सब्जियां बिना धोए खाई जा सकती हैं?
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में ऑर्गेनिक उत्पादों का उपयोग बढ़ रहा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उन्हें बिना धोए खाया जा सकता है। खेतों, परिवहन और बाजारों के दौरान इन पर धूल, मिट्टी, सूक्ष्म जीव और अन्य अवशेष जमा हो सकते हैं। इसलिए चाहे फल और सब्जियां जैविक हों या सामान्य, उनका उपयोग करने से पहले उन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धोना आवश्यक है।
फूड पॉइजनिंग केवल मामूली बीमारी नहीं
अधिकांश लोग फूड पॉइजनिंग को केवल पेट दर्द, उल्टी या दस्त तक सीमित समस्या मानते हैं। हालांकि कई मामलों में यह गंभीर रूप भी ले सकती है। कुछ संक्रमण शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकते हैं और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत भी आ सकती है। बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
क्या हैंड सैनिटाइजर हाथ धोने का विकल्प है?
कोविड काल के बाद हैंड सैनिटाइजर का उपयोग व्यापक हुआ है, लेकिन भोजन से जुड़ी स्वच्छता के लिए केवल सैनिटाइजर पर्याप्त नहीं माना जाता। हाथों पर मौजूद गंदगी, चिकनाई और कुछ प्रकार के सूक्ष्म जीवों को हटाने में साबुन और स्वच्छ पानी अधिक प्रभावी होते हैं। भोजन बनाने या खाने से पहले कम से कम 20 सेकंड तक हाथों को अच्छी तरह धोना आज भी सबसे सुरक्षित और विश्वसनीय उपाय माना जाता है।
जागरूकता ही खाद्य सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी
विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि स्वास्थ्य संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश है। भोजन से जुड़े मिथकों और गलत धारणाओं को दूर करके ही हम स्वयं और अपने परिवार को अनेक बीमारियों से बचा सकते हैं। सुरक्षित भोजन, स्वच्छ आदतें और सही जानकारी मिलकर ही स्वस्थ समाज की नींव तैयार करती हैं। इसलिए भोजन की गुणवत्ता के साथ उसकी सुरक्षा पर भी उतना ही ध्यान देना आवश्यक है जितना उसके स्वाद पर।