Jaipur: राजस्थान कांग्रेस सितंबर के अंतिम या अक्टूबर के (Rajasthan Election 2023) पहले सप्ताह में विधानसभा उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने की तैयारी कर रही हैं। टिकट दावेदारों के स्क्रीनिंग का दौर शुरू हो चुका है। अब राजस्थान में सबसे बड़ी चर्चा यही है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत या सचिन पायलट आखिर टिकट वितरण में किसकी चलेगी? क्योंकि जिस खेमे को ज्यादा टिकट मिलेगा जाहिर है कि रिजल्ट आने के बाद उसका पलड़ा भारी रहेगा।
सचिन को मिलेगा टिकट वितरण में तवज्जो
दरअसल पिछले महीने सचिन पायलट लगातार मौन रहे और जब भी बोले यही बोले कि साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे और बीजेपी को हारएंगे। इसके पीछे की बड़ी वजह सचिन पायलट को लेकर कांग्रेस हाईकमान का सकारात्मक रवैया (Rajasthan Election 2023) बताया जा रहा है। पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं कि सचिन पायलट की गहलोत को लेकर चुप्पी और बार-बार एकजुटता का संदेश की यही कहानी है कि उन्हें कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से जरूर कुछ आश्वासन मिला है। कांग्रेस हाईकमान लगातार हर कमेटियों में सचिन और उनके समर्थकों को जगह दे रही है, इससे यही लगता है कि उनके समर्थकों को टिकट वितरण में तवज्जो मिल सकती है। सचिन पायलट 6 जुलाई को दिल्ली में कांग्रेस के बड़े नेताओं के साथ हुई बैठक के बाद से संतुष्ट नजर आ रहे हैं। अगर टिकट बंटवारे में सचिन पायलट को ज्यादा महत्व मिलने की संभावना नहीं रहती तो जरूर असंतोष उभर कर आता।
कब आएगी कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची?
कांग्रेस के वरिष्ठ चुनाव पर्यवेक्षक मधुसूदन मिस्त्री, प्रदेश में पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन सुखजिंदर सिंह रंधावा और कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल राजस्थान विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर लगातार बैठकें कर रहे हैं। रंधावा पहले ही कह भी चुके हैं कि कांग्रेस उम्मीदवारों की पहली सूची सितंबर के आखिर या अक्टूबर के पहले हफ्ते में आ सकती है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी को दी हरी झंडी
राजस्थान विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बनी तमाम कमेटियों में सचिन पायलट को महत्व मिला है। अब पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी में सचिन के समर्थकों को पर्याप्त जगह मिली जबकि गहलोत को चाहने वाले कम दिखे। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 9 अगस्त को ही राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी को हरी झंडी दी है। इस कमेटी में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उपमुखमंत्री सचिन पायलट, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा समेत 35 नाम शामिल हैं। पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं कि इसमें गहलोत के समर्थक माने जाने वाले कई नाम गायब हैं। महेश जोशी, शांति धारीवाल, और धर्मेंद्र राठौड़ का आदि का नहीं होना क्या कहता है ये कोई भी कार्यकर्ता इसका अर्थ नेगेटिव ही निकालेगा।
सर्वे रिजल्ट पर टिकी कांग्रेस उम्मीदवारों की टिकट
कांग्रेस टिकट वितरण में सर्वे के रिजल्ट को महत्वपूर्ण मान रही है। सर्वे रिपोर्ट जिस भी नेता का खराब आएगा उसको टिकट मिलना मुश्किल है। इस बात के चलते टिकटार्थियों के बीच यह मैसेज चला गया कि अकेले मुख्यमंत्री गहलोत को ही टिकट देने का अधिकार नहीं मिलने वाला है। बताया जाता है कि कांग्रेस के टिकटार्थियों के लिए हुए दो सर्वे की रिपोर्ट फाइनल हो गई है। तीसरे सर्वे की रिपोर्ट का इंतजार है, उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही फाइनल कर लिया जाएगा। अगस्त के अंत तक फाइनल सर्वे रिपोर्ट को दिल्ली कमान को भेजी जाएगी। टिकट किसको मिलेगा इस पर अंतिम मुहर मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को लगानी है।
सीएम गहलोत की राहुल गांधी से दूरी
राहुल गांधी की हालिया मानगढ़ यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री गहलोत (Rajasthan Election 2023) को मंच पर राहुल के ठीक बगल में नहीं, एक सीट बाद जगह मिली। हालांकि सचिन पायलट को 4 सीटों के बाद जगह मिली थी पर सचिन के पास न पार्टी में पद है और न ही सरकार में। लेकिन मुख्यमंत्री प्रदेश का मुखिया होता है। प्रोटोकाल के तहत भी वो सबसे खास होता है। ऐसे कार्यक्रमों के बाद अमूमन सभी बड़े नेताओं के साथ एक फोटोशूट होता है, वो भी नहीं हुआ।
पॉलिटकल अफेयर्स कमेटी बैठक में सीएम गहलोत ने अमित शाह पर साधा निशाना
9 अगस्त की शाम पॉलिटकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में सीएम गहलोत ने काफी दिनों बाद फिर शब्दों के बाण छोड़े। उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह का नाम लेकर उन पुराने दिनों को याद किया कि किस तरह उनकी सरकार गिराने की साजिश हुई थी। बाद में उन्होंने अपनी ही पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल का नाम लेते हुए कह दिया कि उनकी जगह मैं होता तो बता देता कि अनुशासनहीनता क्या चीज होती है। उन्होंने सचिन पायलट का नाम तो नहीं लिया पर जिस तरह प्रताप सिंह खचरियावा, सुखराम बिश्नोई, नीरज डांगी, रघु शर्मा आदि का नाम लिया उससे क्लियर था कि निशाने पर कौन है। कहा जा रहा है उस दिन मानगढ़ की सभा में मंच पर राहुल गांधी के साथ सही जगह न मिलना और फिर पॉलिटकल अफेयर्स कमेटी में अपने समर्थकों का नाम न देखकर ही सीएम गहलोत ने ऐसे तेवर दिखाए।