कोलकाता:भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद पश्चिम बंगाल में शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। भाजपा नेता जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने पत्रकार वार्ता में कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्वयं विकास भवन में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर शिक्षा व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली व्यवस्था में शिक्षा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अराजकता और भ्रष्टाचार की तस्वीर सामने आई है।
पड़ोसी राज्य से आई चिट्ठी के बाद शुरू हुई जांच
जगन्नाथ चट्टोपाध्याय के मुताबिक, पड़ोसी राज्य के मुख्य सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चिंता जताई थी कि राज्य में डिग्रियों की कथित तौर पर बिक्री हो रही है। इसके कारण दूसरे राज्यों के छात्र पश्चिम बंगाल में दाखिला लेने आ रहे हैं। इसी के बाद राज्य के निजी B.Ed कॉलेजों की स्थिति की जांच का फैसला लिया गया।
602 निजी B.Ed कॉलेजों के बुनियादी ढांचे की जांच
सरकार की ओर से राज्य के 602 निजी B.Ed कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर और शैक्षणिक व्यवस्था की समीक्षा की गई। जांच के दौरान यह देखा गया कि कॉलेजों में नियमित पढ़ाई हो रही है या नहीं, पर्याप्त शिक्षक मौजूद हैं या नहीं, छात्र वास्तव में पढ़ रहे हैं या नहीं और वास्तविक शिक्षक प्रशिक्षण की व्यवस्था है या नहीं।
100 अंकों के आधार पर हुआ मूल्यांकन
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि 602 B.Ed कॉलेजों का 100 अंकों के पैमाने पर मूल्यांकन किया गया। इसमें कॉलेजों के बुनियादी ढांचे, पढ़ाई और शैक्षणिक गुणवत्ता समेत विभिन्न मानकों को शामिल किया गया। कुल मिलाकर इन संस्थानों का औसत स्कोर करीब 51.5 प्रतिशत बताया गया।
53 B.Ed कॉलेजों का नहीं मिला कोई पता
जांच में 53 B.Ed कॉलेज ऐसे मिले, जिनका कोई स्पष्ट पता या अस्तित्व नहीं मिल पाया। वहीं, 17 संस्थानों पर NCTE के निर्धारित मानकों और शर्तों का उल्लंघन करने की बात सामने आई है। इन आंकड़ों ने राज्य की B.Ed शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
114 कॉलेजों को मिले सिर्फ 30 अंक
जांच के दौरान 114 B.Ed संस्थानों को महज 30 अंक मिले। वहीं, लगभग 121 कॉलेजों की बुनियादी ढांचागत स्थिति बेहद खराब पाई गई। इसके अलावा करीब 151 कॉलेज ऐसे रहे, जिन्हें 60 से 80 प्रतिशत के बीच अंक मिले।
हर साल करीब 62 हजार B.Ed डिग्री
जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में हर साल लगभग 62 हजार छात्र B.Ed की डिग्री हासिल करते हैं। ऐसे में यदि संस्थानों की गुणवत्ता और प्रशिक्षण व्यवस्था में खामियां हैं, तो इसका सीधा असर राज्य की शिक्षा व्यवस्था और भविष्य में शिक्षक भर्ती की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।
दूसरे राज्यों के छात्रों के दाखिले पर भी सवाल
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि गोवा और पूर्वोत्तर राज्यों सहित दूसरे क्षेत्रों से छात्र पश्चिम बंगाल के B.Ed कॉलेजों में पढ़ने आ रहे हैं, जबकि कई जगहों पर बंगाली भाषा के अलावा अन्य भाषाओं में पढ़ाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
खराब कॉलेजों पर भविष्य में होगी कड़ी कार्रवाई
भाजपा नेता ने साफ संकेत दिया कि जिन B.Ed कॉलेजों में जरूरी बुनियादी ढांचा नहीं है या जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते, उनके खिलाफ भविष्य में कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़े स्तर पर सुधार की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है।