जम्मू-कश्मी - जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) के जरिए घुसपैठ की कोशिशों पर सुरक्षा बलों ने इस साल अब तक कई बार कार्रवाई की है। सेना, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की सतर्कता के चलते अलग-अलग सेक्टरों में घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम किया गया और कुछ मामलों में आतंकियों तथा घुसपैठियों को मार गिराया गया। लगातार सामने आ रही गतिविधियों को देखते हुए सीमा पर निगरानी और मजबूत की गई है।
सांबा से उड़ी तक सामने आईं कोशिशें
अधिकारियों के मुताबिक, इस साल घुसपैठ की संदिग्ध गतिविधियां सांबा, सुंदरबनी, भींबर गली, नौशेरा, उड़ी, पुंछ और राजौरी जैसे संवेदनशील इलाकों में सामने आईं। सुरक्षा बलों ने खुफिया सूचनाओं के साथ जमीनी निगरानी और तकनीकी संसाधनों की मदद से संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया। इसके बाद संबंधित इलाकों में तलाशी और अभियान चलाकर घुसपैठ की कोशिशों को रोकने की कार्रवाई की गई।
25 जनवरी को सांबा में घुसपैठिया ढेर
इस साल की शुरुआती घटनाओं में 25 जनवरी को सांबा जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए भारतीय क्षेत्र में दाखिल होने की कोशिश का मामला सामने आया। BSF जवानों ने कार्रवाई करते हुए एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को मार गिराया। इसके बाद 19 फरवरी को राजौरी के सुंदरबनी सेक्टर में नाथुआ टिब्बा इलाके में घुसपैठ की कोशिश को सेना ने नाकाम किया। इस कार्रवाई में लगातार निगरानी और खुफिया इनपुट अहम रहे।
भींबर गली और उड़ी में भी कार्रवाई
4 मार्च को भींबर गली सेक्टर में संदिग्ध गतिविधि का पता चलने के बाद सेना ने इलाके में अभियान शुरू किया। जमीनी तलाशी के साथ निगरानी बढ़ाई गई और हवाई संसाधनों का भी इस्तेमाल किया गया। वहीं, 14-15 मार्च की रात बारामुला जिले के उड़ी सेक्टर के बुच्चर इलाके में घुसपैठ की कोशिश के दौरान सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की। इस दौरान एक आतंकी के मारे जाने की जानकारी सामने आई।
राजौरी में भी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर
अगस्त के अंतिम दिनों में राजौरी सेक्टर के अग्रिम इलाकों में भी घुसपैठ की संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। जवानों ने समय रहते गतिविधियों का पता लगाकर गोलीबारी की और घुसपैठियों को LoC पार करने से रोकने की कार्रवाई की। बार-बार सामने आ रही ऐसी कोशिशों को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा ग्रिड को और मजबूत किया गया है।
ड्रोन और नाइट-विजन कैमरों से निगरानी
सीमा की निगरानी के लिए सुरक्षा बल अब आधुनिक तकनीक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। हाई-रिजॉल्यूशन और नाइट-विजन कैमरों से लैस ड्रोन और क्वाडकॉप्टर के जरिए अग्रिम क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर स्मार्ट फेंसिंग समेत अन्य तकनीकी उपायों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। जमीनी गश्त के साथ हवाई निगरानी को सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया गया है।
संदिग्ध ड्रोन गतिविधियां भी चुनौती
हाल के महीनों में सीमा के आसपास संदिग्ध ड्रोन गतिविधियां भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बनी हैं। ऐसे मामलों में सुरक्षा बलों ने अग्रिम इलाकों में तलाशी अभियान चलाने के साथ निगरानी बढ़ाई है। सुरक्षा एजेंसियों का फोकस अब घुसपैठ के संभावित रास्तों पर चौकसी बढ़ाने के साथ तकनीकी निगरानी को और प्रभावी बनाने पर है। LoC और IB पर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के जरिए किसी भी घुसपैठ की कोशिश को शुरुआती स्तर पर ही रोकने की कोशिश की जा रही है।