नई दिल्ली/काठमांडू, 3 सितंबर 2026 | नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद भारत का राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक अब तक बाढ़ प्रभावित नेपाल से 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें बुधवार को रेस्क्यू किए गए तीन लोग भी शामिल हैं। वहीं तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में तीर्थयात्रा और दूसरी गतिविधियों के लिए गए 410 भारतीय नागरिक बुधवार को चीन से रवाना हो गए। भारत ने बुधवार को नेपाल के लिए राहत सहायता की पांचवीं खेप भी पहुंचाई। भारतीय वायुसेना के विमान से दवाइयों के साथ विशेष रेस्क्यू टीम और आधुनिक उपकरण काठमांडू भेजे गए हैं।
पांचवें विमान से पहुंचीं 5.5 टन जरूरी दवाइयां
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारतीय वायुसेना का पांचवां राहत विमान बुधवार को काठमांडू पहुंचा। इसमें करीब 5.5 टन मेडिकल सप्लाई थी, जिसमें एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएं, सर्जिकल सामान और दूसरी आवश्यक दवाइयां शामिल थीं। इसके साथ 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल और छह टन से अधिक रेस्क्यू उपकरण भी नेपाल पहुंचाए गए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस सहायता की जानकारी देते हुए कहा था कि विमान में विशेषज्ञ बचाव दल और जरूरी दवाइयां भेजी जा रही हैं।
अब तक करीब 74 टन मदद पहुंचा चुका भारत
ताजा MEA अपडेट के मुताबिक पांचवीं खेप के बाद भारत की ओर से नेपाल को उपलब्ध कराई गई राहत सहायता करीब 74 टन हो गई है। इसमें दवाइयां, खाने-पीने की सामग्री, टेंट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग, सोलर लैंप, जनरेटर और दूसरी आपदा राहत सामग्री शामिल है। यहां एक जरूरी अपडेट है—बुधवार सुबह शुरुआती रिपोर्टों में कुल सहायता 68.5 टन बताई गई थी, लेकिन पांचवीं खेप की पूरी मेडिकल और रेस्क्यू सामग्री जोड़ने के बाद MEA के बाद के अपडेट में कुल सहायता करीब 74 टन बताई गई।
भारतीय राजदूत ने नेपाल सरकार को सौंपी राहत सामग्री
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने काठमांडू पहुंची राहत सामग्री नेपाल सरकार को सौंपी। भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय की टीमें नेपाल प्रशासन के साथ राहत, नागरिकों की सुरक्षित वापसी और विशेषज्ञ बचाव अभियानों के समन्वय में लगी हुई हैं।
सुरंग में 100 मीटर तक आगे बढ़ी भारतीय टीम
नेपाल में सबसे मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन जलविद्युत परियोजनाओं की कीचड़ और मलबे से भरी सुरंगों में चल रहा है। भारतीय Tunnel Rescue Team ने अपना बेस त्रिशूली से स्याब्रुबेसी स्थानांतरित कर दिया है, ताकि चिलीमे में चल रहे अभियान तक पहुंचने में कम समय लगे। नेपाली सेना के साथ संयुक्त अभियान में टीम सुरंग के अंदर भारी कीचड़ और रुकावटों के बावजूद करीब 100 मीटर आगे बढ़ने में सफल रही।
भारी मशीनें पहुंचाने के लिए बन सकती है अस्थायी सड़क
रेस्क्यू की रफ्तार बढ़ाने के लिए सुरंग तक भारी मशीनरी पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक एक Improvised Road Approach यानी अस्थायी रास्ता बनाने की संभावना का भी आकलन किया गया है। इससे बड़ी मशीनें सुरंग के नजदीक पहुंचाकर मलबा हटाने और अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
आज से ऑपरेशन में जुटेंगे 11 नए Rescue Experts
बुधवार को भारत से नेपाल पहुंचे 11 विशेषज्ञ अपने विशेष उपकरणों के साथ त्रिशूली बाजार के पास पहुंच चुके हैं। इन विशेषज्ञों के गुरुवार से नेपाली सेना के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल होने की योजना है।
DNA से मृतकों की पहचान में भी मदद कर रहा भारत
नेपाल के सामने एक बड़ी चुनौती बड़ी संख्या में बरामद शवों की पहचान करना भी है। भारत की फोरेंसिक टीम काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में नेपाली विशेषज्ञों के साथ मिलकर DNA samples की जांच और विश्लेषण कर रही है। इसका मकसद अज्ञात शवों की पहचान कर प्रभावित परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाने में मदद करना है।
मौतों का आंकड़ा अब 1,204 पहुंचा
आपदा में मरने वालों का आंकड़ा लगातार बदल रहा है। बुधवार सुबह NDRRMA के पहले अपडेट में 1,114 शव बरामद और 3,916 लोग लापता बताए गए थे। लेकिन बुधवार शाम 6 बजे के अपडेट तक संख्या बढ़कर 1,204 शव और 4,216 लोग लापता हो गई। इसलिए 3 सितंबर की खबर में यही नवीनतम आंकड़ा इस्तेमाल करना ज्यादा सही है। रेस्क्यू टीमें खासतौर पर रसुवा और नुवाकोट के जलविद्युत प्रोजेक्ट और सुरंगों में लापता लोगों की तलाश कर रही हैं।
PM बालेन शाह ने दुनिया से मांगी Climate Action
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र ‘बालेन’ शाह ने संसद में इस आपदा को हिमालयी क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी बताया है। उन्होंने भारत और चीन की समय पर मिली मदद के लिए आभार भी जताया। शाह ने कहा कि हिमालय में जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहे खतरों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मजबूती से उठाने की जरूरत है।
आखिर कैसे आई थी इतनी विनाशकारी बाढ़?
शुरुआती रिपोर्टों में घटना को “तिब्बत में ग्लेशियर टूटने” से जोड़कर बताया गया था, लेकिन वैज्ञानिक और सैटेलाइट विश्लेषण के बाद तस्वीर ज्यादा स्पष्ट हुई है। Nature India के मुताबिक नेपाल-चीन सीमा के पास नेपाली हिस्से में Lhende Khola catchment के ऊंचे हिमालयी इलाके से ice-rock avalanche नीचे गिरी। मलबे ने नदी को कुछ समय के लिए रोककर प्राकृतिक बांध जैसा अवरोध बनाया और उसके टूटने से पानी, चट्टान और मलबे की विनाशकारी लहर Bhote Koshi और फिर Trishuli river system में आगे बढ़ी। Reuters ने भी इसे नेपाल-चीन सीमा के पास glacier/ice-rock collapse से शुरू हुई cascading disaster बताया है।
भारत के लिए भी क्यों महत्वपूर्ण है ये आपदा?
नेपाल की नदियां आगे चलकर भारत के मैदानी इलाकों से जुड़ती हैं। इस बाढ़ का मलबा और बढ़ा जलप्रवाह नेपाल से नीचे की ओर पहुंचने के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ नदी क्षेत्रों तक भी असर डाल चुका है। इसके अलावा बड़ी संख्या में भारतीय यात्री और कैलाश मानसरोवर से जुड़े श्रद्धालु घटना के समय नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में थे। इसी कारण भारत का अभियान राहत सामग्री भेजने के साथ अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी पर भी केंद्रित है।