अयोध्या: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक बुधवार को मणिराम दास छावनी में चल रही है। बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है। खोज समिति की ओर से मंगलवार को ट्रस्ट को तीन योग्य नामों का पैनल सौंपा गया था। अब ट्रस्ट बोर्ड इन नामों पर विचार कर अंतिम निर्णय ले सकता है। बैठक में अयोध्या के जिलाधिकारी समेत ट्रस्ट के 9 सदस्य शामिल हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, CEO की नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट के तीन खाली पड़े सदस्य पदों को भरने पर भी फैसला हो चुका है।
ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति की खबर
सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों के नाम तय किए गए हैं। इनमें अयोध्या से मदन मोहन पांडेय, दिल्ली से महेश भागचन्दका और शिकोहाबाद से निर्मला यादव शामिल हैं। हालांकि, इन नियुक्तियों की आधिकारिक घोषणा ट्रस्ट की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए किए जाने की संभावना है।
मणिराम दास छावनी में चल रही अहम बैठक
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आवास मणिराम दास छावनी में हो रही है। बैठक में महंत नृत्य गोपाल दास के अलावा कृष्ण मोहन, गोविंद देव गिरि महाराज, विश्व हिंदू परिषद से दिनेश जी, बजरंग बांगड़ा, कमलनयन दास, महंत दिनेंद्र दास जी महाराज और जगदीश आफले समेत अन्य सदस्य शामिल हुए हैं। कुछ सदस्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में जुड़े हैं। वहीं अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी भी बैठक में पहुंचे हैं।
CEO की नियुक्ति पर सर्वसम्मति से होगा फैसला
ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने पहले ही स्पष्ट किया था कि CEO की नियुक्ति पर अंतिम फैसला ट्रस्ट बोर्ड विचार-विमर्श के बाद करेगा। उन्होंने कहा था कि निर्णय सर्वसम्मति से लिया जाएगा और बैठक समाप्त होने के बाद ही परिणाम की घोषणा की जाएगी। CEO की नियुक्ति के अलावा बैठक में ट्रस्ट डीड में संशोधन और ट्रस्ट के प्रेस प्रवक्ता की नियुक्ति जैसे प्रशासनिक मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।
प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली समिति ने सुझाए तीन नाम
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के चयन के लिए रिटायर्ड जज प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में खोज समिति बनाई गई थी। समिति ने मंगलवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी।
तीन सदस्यीय समिति में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हवारे भी शामिल थे। समिति ने संस्थागत नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन विशेषज्ञता, ईमानदारी और दूरदर्शिता जैसे मानकों के आधार पर तीन योग्य पेशेवरों के नामों का पैनल तैयार किया है।
CEO की नियुक्ति क्यों अहम?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले CEO की नियुक्ति मंदिर निर्माण और उससे जुड़े व्यापक प्रशासनिक कार्यों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ट्रस्ट के सामने मंदिर परिसर से जुड़े कार्यों के साथ-साथ प्रशासन, प्रबंधन और भविष्य की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है।
अब सभी की नजर ट्रस्ट की बैठक के अंतिम फैसले पर है कि अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO कौन होगा और नए ट्रस्ट सदस्यों की नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा कब की जाएगी।