नई दिल्ली/काठमांडू, 2 सितंबर 2026 | नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद भारत लगातार राहत और बचाव अभियान में मदद कर रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार सुबह बताया कि भारत का पांचवां राहत विमान नेपाल के लिए रवाना हो गया है। इसमें 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल, आधुनिक रेस्क्यू उपकरण और 5.5 टन जरूरी दवाइयां भेजी गई हैं। उधर, नेपाल में आपदा का पैमाना लगातार बढ़ रहा है। नेपाल पुलिस के बुधवार सुबह 5 बजे तक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ में मरने वालों की संख्या 1,127 पहुंच गई है, जबकि 4,858 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। तलाश और राहत अभियान लगातार जारी है।
जयशंकर बोले- नेपाल के लिए रवाना हुआ भारत का पांचवां विमान
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि नेपाल के लिए भारत का पांचवां विमान रवाना किया गया है। इस विमान के साथ 11 सदस्यीय स्पेशल रेस्क्यू टीम, जरूरी उपकरण और 5.5 टन आवश्यक दवाइयां भेजी गई हैं। नेपाल में बाढ़ के बाद भारत की ओर से बड़े स्तर पर Humanitarian Assistance and Disaster Relief यानी HADR अभियान चलाया जा रहा है।
अब तक 68 टन से ज्यादा राहत सामग्री भेज चुका भारत
भारत अब तक नेपाल के लिए 68 टन से अधिक आपात राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीमें भेज चुका है। राहत सामग्री में कंबल, स्लीपिंग बैग, मजबूत तिरपाल, प्लास्टिक शीट, हाइजीन किट, खाने के पैकेट, जरूरी दवाइयां, सोलर लैंप, पानी शुद्ध करने की गोलियां और पोर्टेबल जनरेटर शामिल हैं। भारत की मदद अब केवल राहत सामग्री पहुंचाने तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञ टीमें बाढ़ प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और मृतकों की पहचान में भी नेपाल की मदद कर रही हैं।
ताजा आंकड़ा- 1,127 लोगों की मौत
नेपाल पुलिस के बुधवार सुबह जारी नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक आपदा में मरने वालों की संख्या 1,127 तक पहुंच गई है। सबसे ज्यादा 348 शव चितवन जिले में बरामद किए गए हैं। नवलपरासी पूर्व में 217, नवलपरासी पश्चिम में 190, नुवाकोट में 155, गोरखा में 66, धादिंग में 59, रसुवा में 45 और तनहूं में 38 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा नौ शव भारत में मिलने की जानकारी दी गई है। बाढ़ का पानी लोगों को काफी दूर तक बहाकर ले गया था, इसलिए नदी के निचले हिस्सों और दूरदराज क्षेत्रों में शव मिलने का सिलसिला जारी है।
4,858 लोग अब भी लापता
नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों में 4,858 लोगों को लापता बताया गया है। सर्च ऑपरेशन के लिए हजारों पुलिस और सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। एक दिन पहले NDRRMA ने 3,916 लोगों के लापता होने की जानकारी दी थी, जबकि नेपाल पुलिस के अलग अपडेट में 4,606 का आंकड़ा सामने आया था। आपदा प्रभावित क्षेत्रों से नई सूचनाएं और शिकायतें मिलने के साथ ये आंकड़े लगातार बदल रहे हैं।
सैकड़ों विदेशी नागरिक भी लापता
आपदा के बाद लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। मंगलवार के NDRRMA आंकड़ों के अनुसार 583 विदेशी नागरिक संपर्क से बाहर बताए गए थे। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र धार्मिक पर्यटन, पर्वतीय पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का प्रमुख मार्ग होने के कारण आपदा के समय यहां कई विदेशी नागरिक मौजूद थे।
Hydropower Tunnels में सबसे मुश्किल Rescue
नेपाल की सबसे बड़ी चिंता रसुवा और नुवाकोट जिलों की क्षतिग्रस्त जलविद्युत परियोजनाएं हैं। बड़ी संख्या में कर्मचारी परियोजनाओं से जुड़े क्षेत्र और सुरंगों में लापता हुए हैं। नेपाल सरकार के अनुरोध पर भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेष तकनीकी टीमें tunnel rescue operations में मदद कर रही हैं। भारतीय टीम ने चिलिमे प्रोजेक्ट की एक सुरंग में अंदर तक पहुंच बनाने में सफलता हासिल की है, जबकि Langtang क्षेत्र में टीम करीब 185 मीटर तक अंदर जांच कर चुकी है।
भारत की अलग-अलग टीमें नेपाल में कर रहीं काम
नेपाल में भारत की कई विशेषज्ञ टीमें अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 24 सदस्यीय भारतीय tunnel rescue team को दो हिस्सों में बांटकर Chilime और Langtang hydropower sites पर नेपाली सेना के साथ लगाया गया है। वहीं चीन की टीम Upper Trishuli 3A क्षेत्र में काम कर रही है। बुधवार को भेजी गई 11 सदस्यीय नई टीम इससे अलग अतिरिक्त सहायता का हिस्सा है।
मृतकों की पहचान में जुटी भारत की 19 सदस्यीय Forensic Team
हजार से ज्यादा शव और मानव अवशेष मिलने के कारण मृतकों की पहचान करना भी नेपाल के सामने बड़ी चुनौती बन गया है। भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम नेपाली विशेषज्ञों के साथ DNA samples का विश्लेषण कर रही है। टीम नेपाल पुलिस की Central Forensic Science Laboratory और काठमांडू घाटी के खुमलटार स्थित National Forensic Science Laboratory में काम कर रही है। इसका मकसद अज्ञात शवों और मानव अवशेषों की पहचान जल्द करना है, ताकि परिवारों को अपने लापता परिजनों के बारे में सही जानकारी मिल सके।
आखिर कैसे आई इतनी विनाशकारी बाढ़?
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों का एक विशाल हिस्सा ढहकर नदी घाटी में गिरा था। Satellite imagery का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक एक glacier के निचले हिस्से के ढहने से बर्फ, चट्टान, मिट्टी और पानी का विशाल प्रवाह पैदा हुआ हो सकता है, जिसने downstream इलाकों में भयावह flash flood पैदा कर दी। इसलिए घटना को केवल सामान्य बारिश से आई बाढ़ कहना सही नहीं होगा। वैज्ञानिक जांच में glacier/ice-rock collapse को प्रमुख trigger माना जा रहा है।
सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं तबाह
बाढ़ ने नेपाल के कई गांवों, सड़कों, पुलों और hydropower projects को भारी नुकसान पहुंचाया है।
Reuters के मुताबिक बाढ़ से नेपाल की करीब 431 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता, यानी कुल क्षमता का लगभग 10 प्रतिशत प्रभावित हुई है। इसका असर इतना पड़ा कि बिजली निर्यात करने वाला नेपाल फिलहाल घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए भारत से बिजली आयात कर रहा है।
अब Rescue के साथ Rehabilitation पर भी जोर
घटना के एक सप्ताह बाद कई इलाकों में जीवित लोगों की तलाश लगातार मुश्किल होती जा रही है। राहत एजेंसियां अब search-rescue के साथ भोजन, पानी, दवा, अस्थायी आवास और पुनर्वास पर भी फोकस बढ़ा रही हैं। Reuters की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक हजारों लोग अब भी लापता हैं और कई इलाकों में मलबे की मोटी परत के कारण खोज अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। भारत ने साफ किया है कि नेपाल की जरूरत के मुताबिक राहत, चिकित्सा सहायता और विशेषज्ञ टीमों का सहयोग जारी रहेगा।