भोपाल, 2 सितंबर 2026 | मध्य प्रदेश में इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का रंग कुछ खास रहने वाला है। 4 सितंबर को प्रदेशभर में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी। राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर भी बड़ा आयोजन किया जाएगा, जहां 1000 से ज्यादा छोटे बच्चे बाल-कृष्ण के स्वरूप में अपने परिजनों के साथ शामिल होंगे। कार्यक्रम में मटकी फोड़, भक्ति गायन और लोकनृत्य जैसी गतिविधियां होंगी। प्रदेश सरकार ने इस बार जन्माष्टमी को केवल मंदिरों तक सीमित न रखते हुए स्कूल, आंगनवाड़ी, जनजातीय छात्रावास और सार्वजनिक स्थलों तक ले जाने की तैयारी की है।
CM हाउस में नजर आएंगे 1000 से ज्यादा बाल-कृष्ण
मुख्यमंत्री निवास पर 4 सितंबर को होने वाले मुख्य कार्यक्रम में 1000 से अधिक छोटे बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप में तैयार कर बुलाया जाएगा। बच्चे अपने माता-पिता के साथ कार्यक्रम में पहुंचेंगे। यहां भक्ति गायन, लोकनृत्य और मटकी फोड़ के कार्यक्रम होंगे। बच्चों को माखन-मिश्री, लड्डू गोपाल और श्रीकृष्ण के बाल जीवन से जुड़े प्रसंगों पर आधारित साहित्य भी भेंट किए जाने की योजना है।
81 प्रमुख कृष्ण मंदिरों में खास सजावट
जन्माष्टमी पर प्रदेश के करीब 81 प्रमुख कृष्ण मंदिरों और धार्मिक स्थलों में विशेष आयोजन किए जाएंगे। मंदिरों में आकर्षक सजावट, भजन-कीर्तन, दीप प्रज्ज्वलन, सामूहिक आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। स्थानीय कलाकारों और भजन मंडलियों को भी इन आयोजनों से जोड़ा जाएगा। जिला प्रशासन को स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
हर जिले में दिखेगा जन्माष्टमी का रंग
प्रदेश सरकार के निर्देश के मुताबिक प्रत्येक जिले के प्रमुख कृष्ण मंदिरों, मठों और देवालयों में विशेष श्रृंगार कराया जाएगा। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता अभियान, मटकी सज्जा, मटकी फोड़, भजन गायन और बांसुरी वादन जैसे कार्यक्रम भी होंगे। जन्माष्टमी की झांकियों में कृष्ण जन्म, वृंदावन, गोवर्धन पूजा और गीता उपदेश जैसे प्रसंगों को भी जीवंत रूप में दिखाया जाएगा।
स्कूलों में मटकी और बांसुरी प्रतियोगिता
इस बार स्कूलों के बच्चों को भी जन्माष्टमी के आयोजन में खास तौर पर शामिल किया जा रहा है। स्कूलों में मटकी प्रतियोगिता, बांसुरी प्रतियोगिता, जीवंत झांकी निर्माण और तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। छोटे बच्चों को बाल-कृष्ण के रूप में तैयार कर उनकी विशेष प्रस्तुतियां भी कराई जाएंगी।
आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को भी जोड़ा जाएगा
जनजातीय छात्रावास और आश्रम शालाओं में भी जन्माष्टमी से जुड़े कार्यक्रम होंगे। यहां श्रीकृष्ण वेशभूषा, चित्रकला, भजन और बांसुरी से जुड़े कार्यक्रम कराए जाएंगे। इसके साथ स्थानीय जनजातीय संस्कृति और कृष्ण से जुड़े प्रसंगों को जोड़कर गतिविधियां कराने की तैयारी है।
बच्चों के लिए पोषण और स्वास्थ्य शिविर
राज्य सरकार ने जन्माष्टमी के अवसर को बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से भी जोड़ा है। 29 अगस्त से 4 सितंबर तक बच्चों के लिए विशेष पोषण और स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक स्कूलों में विशेष भोजन व्यवस्था कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग इस अभियान में मिलकर काम करेंगे।
भोपाल में सात दिन चलेगी श्रीरासलीला
जन्माष्टमी के अवसर पर भोपाल में सात दिवसीय श्रीरासलीला समारोह भी आयोजित किया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश के ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर कार्यक्रम होंगे, जिनका संबंध भगवान श्रीकृष्ण से माना जाता है। इनमें उज्जैन का गोपाल मंदिर और सांदीपनि आश्रम समेत कई स्थान शामिल हैं।
4 सितंबर को ही मनेगी जन्माष्टमी
साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का मुख्य पर्व शुक्रवार, 4 सितंबर को मनाया जाएगा। पूजा और जन्मोत्सव के कई धार्मिक कार्यक्रम मध्यरात्रि के बाद 5 सितंबर तक जारी रहेंगे। इसलिए प्रदेश सरकार के मुख्य आयोजन भी 4 सितंबर को रखे गए हैं।
सरकार का फोकस बच्चों और युवाओं पर
इस बार जन्माष्टमी आयोजनों में बच्चों और युवाओं की भागीदारी पर खास जोर दिया गया है। स्कूलों की प्रतियोगिताओं से लेकर CM हाउस में 1000 बाल-कृष्ण और युवाओं के लिए श्रीकृष्ण से जुड़े साहित्य तक, सरकार त्योहार को सांस्कृतिक शिक्षा और जनभागीदारी के साथ जोड़कर आयोजित करने की तैयारी में है।