नई दिल्ली - शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की अध्यक्षता अब पाकिस्तान के हाथों में आ गई है। मंगलवार को बिश्केक में पाकिस्तान को अगले अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए कहा कि उनका देश अगले एक साल तक “विजन को कार्यरूप देना: कनेक्टिविटी, नवाचार और साझा समृद्धि” की थीम के तहत संगठन की गतिविधियों का संचालन करेगा।
पाकिस्तान की अध्यक्षता के दौरान SCO के तहत करीब 30 बैठकें आयोजित होने की संभावना है। इनमें अधिकारियों, मंत्रियों और राष्ट्राध्यक्षों की बैठकें शामिल होंगी। इन बैठकों के पाकिस्तान में आयोजित होने के साथ ही भारत की भागीदारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित पाकिस्तान यात्रा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
क्या SCO की बैठकों में शामिल होंगे भारतीय अधिकारी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि पाकिस्तान में होने वाली SCO की विभिन्न बैठकों में भारत के अधिकारी और मंत्री किस स्तर पर भाग लेंगे। दोनों देशों के बीच मौजूदा रिश्तों को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण रहेगा। हालांकि, भारत ने अतीत में राजनीतिक तनाव के बावजूद SCO के मंच को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया है। इसका उदाहरण 2024 में देखने को मिला, जब पाकिस्तान में SCO के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर पाकिस्तान पहुंचे थे।
2027 के SCO शिखर सम्मेलन पर टिकी नजर
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2027 में पाकिस्तान में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जाएंगे। शिखर सम्मेलन जुलाई से सितंबर के बीच होने की संभावना है। इस सवाल का अंतिम जवाब फिलहाल भविष्य में ही सामने आएगा। हालांकि, भारत-पाकिस्तान संबंधों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी की पाकिस्तान यात्रा की संभावना कम मानी जा रही है। फिर भी SCO जैसे बहुपक्षीय मंच पर भारत की रणनीति केवल द्विपक्षीय संबंधों से तय होगी या संगठन में अपनी भूमिका को ध्यान में रखकर, यह देखने वाली बात होगी।
2023 में भारत की अध्यक्षता के दौरान क्या हुआ था?
वर्ष 2023 में SCO की अध्यक्षता भारत के पास थी। उस समय भी भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव था। इसके बावजूद पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी SCO विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए गोवा पहुंचे थे। हालांकि, उस वर्ष SCO शिखर सम्मेलन का आयोजन ऑनलाइन किया गया था। इसमें पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने भी वर्चुअल माध्यम से भाग लिया था।
मोदी की SCO में भागीदारी का रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2015 से SCO शिखर सम्मेलनों में लगातार सक्रिय रहे हैं। कुछ वर्षों में सम्मेलन वर्चुअल माध्यम से आयोजित हुए, जबकि कई मौकों पर उन्होंने व्यक्तिगत रूप से हिस्सा लिया। 2024 का अस्ताना शिखर सम्मेलन ऐसा प्रमुख अवसर था, जब प्रधानमंत्री मोदी व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए। 2025 में चीन के तियानजिन और 2022 में समरकंद में आयोजित SCO शिखर सम्मेलनों में मोदी और शहबाज शरीफ ने एक ही मंच साझा किया था, लेकिन दोनों के बीच औपचारिक या अनौपचारिक बातचीत नहीं हुई।
2015 में दिखा था अलग माहौल
भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक समय ऐसा भी था जब दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत के रास्ते खुले हुए थे। 2015 में रूस के ऊफा में हुए SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से अलग मुलाकात की थी। इसके बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के स्तर पर भी बातचीत हुई। हालांकि, बाद के वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में काफी बदलाव आया और संवाद की प्रक्रिया लगभग ठहर गई।
पाकिस्तान की अध्यक्षता में भारत की रणनीति अहम
अब पाकिस्तान की SCO अध्यक्षता भारत के लिए कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चरण होने जा रही है। एक तरफ संगठन की बैठकों में भारत की सक्रिय भागीदारी का सवाल है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय रिश्तों की संवेदनशीलता भी बनी हुई है। ऐसे में 2027 में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन को लेकर भारत का फैसला सिर्फ एक कार्यक्रम में भागीदारी तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह दोनों देशों के मौजूदा रिश्तों और भारत की व्यापक विदेश नीति का भी संकेत माना जा सकता है।