पणजी: गोवा विधानसभा ने गोवा बाल (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया है। इस संशोधन का उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़े राज्य के कानून में मौजूद ‘कुष्ठ रोग’ के संदर्भ को हटाना है। सरकार का कहना है कि इससे कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के प्रति सामाजिक कलंक और भेदभाव को कम करने में मदद मिलेगी।
गोवा बाल अधिनियम, 2003 में होगा संशोधन
राज्य के महिला एवं बाल विकास मंत्री विश्वजीत राणे ने मंगलवार को विधानसभा में गोवा बाल अधिनियम, 2003 में संशोधन से संबंधित विधेयक पेश किया। चर्चा के बाद सदन ने इसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि संशोधन का मकसद कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के प्रति सामाजिक भेदभाव और कलंक को खत्म करना है। साथ ही राज्य के कानून को 7 मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप बनाने के लिए भी यह कदम उठाया गया है।
कानून की दो धाराओं से हटेगा ‘कुष्ठ रोग’ शब्द
संशोधन विधेयक में मूल अधिनियम के दो प्रावधानों से ‘कुष्ठ रोग’ शब्द हटाने का प्रस्ताव किया गया है। गोवा बाल अधिनियम की धारा-2 में पहले कुष्ठ रोग और HIV को ऐसी बीमारियों के रूप में संदर्भित किया गया था, जिनसे सामाजिक कलंक जुड़ा हुआ है।
अब संशोधन के बाद इस प्रावधान से कुष्ठ रोग का उल्लेख हटा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि कानून की भाषा में बदलाव से बीमारी से प्रभावित लोगों के प्रति भेदभाव कम करने और समानता की भावना को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू होगा कानून
विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगा।