MP TET Controversy: मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की अनिवार्यता को लेकर विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। खासतौर पर वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को लेकर शिक्षक संगठनों की ओर से लगातार अपनी मांगें उठाई जा रही हैं। इसी सिलसिले में भोपाल जॉइंट टीचर फ्रंट के प्रतिनिधियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। शिक्षक संगठन ने उनके सामने TET अनिवार्यता से जुड़े मुद्दे रखे और शिक्षकों के पक्ष में हस्तक्षेप करने की मांग की। मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने शिक्षक संगठनों को आश्वासन दिया कि देशभर के करीब 25 लाख शिक्षकों से जुड़े इस मुद्दे को लेकर वे उनकी लड़ाई लड़ेंगे।
2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों का मुद्दा क्या है?
मध्यप्रदेश में TET की अनिवार्यता को लेकर खास तौर पर वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों का मामला चर्चा में है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि TET की अनिवार्यता से बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं, जो पहले से ही शिक्षा व्यवस्था में सेवाएं दे रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर भोपाल जॉइंट टीचर फ्रंट के प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। संगठन ने कांग्रेस नेता से इस मामले को व्यापक स्तर पर उठाने की अपील की।
राहुल गांधी से शिक्षकों ने की हस्तक्षेप की मांग
शिक्षक संगठन के प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी के सामने TET से जुड़े प्रावधानों और उससे शिक्षकों पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि शिक्षकों के हित में इस मामले को राजनीतिक और संवैधानिक स्तर पर उठाया जाए। संगठन का कहना है कि बड़ी संख्या में शिक्षक इस व्यवस्था से प्रभावित हो सकते हैं। मुलाकात के दौरान राहुल गांधी की ओर से शिक्षकों को आश्वासन मिलने की बात सामने आई है। उन्होंने देशभर के लगभग 25 लाख शिक्षकों से जुड़े इस विषय पर उनके साथ खड़े होने की बात कही।
उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र
इस मामले को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस ने भी सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। सिंघार ने अपने पत्र में तमिलनाडु सरकार का उदाहरण देते हुए मध्यप्रदेश में भी शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता खत्म करने की मांग उठाई है।
विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग
उमंग सिंघार का कहना है कि शिक्षकों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए। इसी को देखते हुए उन्होंने सरकार से विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। कांग्रेस का तर्क है कि यदि बड़ी संख्या में शिक्षक इस नियम से प्रभावित हो रहे हैं तो सरकार को उनके पक्ष को सुनते हुए समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए। अब इस मुद्दे पर सरकार की ओर से क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर शिक्षकों और राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।
तमिलनाडु मॉडल का दिया गया हवाला
TET की अनिवार्यता खत्म करने की मांग के समर्थन में कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने तमिलनाडु का उदाहरण सामने रखा है। उन्होंने मांग की है कि मध्यप्रदेश में भी इसी तरह शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए TET अनिवार्यता पर पुनर्विचार किया जाए। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा मध्यप्रदेश की राजनीति में और जोर पकड़ सकता है।
25 लाख शिक्षकों के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का दावा
राहुल गांधी से हुई मुलाकात के बाद शिक्षक संगठनों का दावा है कि अब TET से जुड़ा यह मुद्दा केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। राहुल गांधी की ओर से देशभर के करीब 25 लाख शिक्षकों से जुड़े विषय पर लड़ाई लड़ने का आश्वासन मिलने की बात कही गई है। यदि यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठता है तो मध्यप्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों में TET से प्रभावित शिक्षकों के लिए भी यह महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम हो सकता है।
सरकार के रुख पर टिकी नजर
फिलहाल TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षक संगठनों और कांग्रेस की मांग सामने आ चुकी है। एक तरफ शिक्षक संगठन अपने हितों को लेकर सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग उठाई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मध्यप्रदेश सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती है और क्या TET अनिवार्यता को लेकर कोई वैकल्पिक व्यवस्था या राहत दी जाती है?