नई दिल्ली - शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और रूस के रिश्तों को लेकर एक अहम कूटनीतिक मुलाकात हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं के बीच करीब 50 मिनट की बातचीत का कार्यक्रम तय था। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत-रूस संबंधों पर वैश्विक स्तर पर लगातार नजर बनी हुई है।

यूक्रेन युद्ध पर पीएम मोदी का साफ संदेश
बैठक के दौरान यूक्रेन युद्ध भी प्रमुख मुद्दों में रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन से कहा कि दुनिया को लगातार चल रहे युद्ध से आगे बढ़कर शांति की दिशा में जाना चाहिए। उन्होंने भारत के उस रुख को दोहराया कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध का हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम दुनिया में उम्मीद पैदा करता है। उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने की जरूरत पर जोर दिया।
भारत-रूस संबंधों की भी हुई समीक्षा
बैठक का एक अहम हिस्सा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा रहा। भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और अंतरिक्ष समेत कई क्षेत्रों में लंबे समय से सहयोग है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में दोनों देशों के रिश्तों के पूरे दायरे की समीक्षा किए जाने की उम्मीद पहले ही जताई गई थी। हाल में भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक भी मॉस्को में हुई थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।
तेल और उर्वरक की आपूर्ति भी अहम
रूस भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। खास तौर पर कच्चे तेल की खरीद ने हाल के वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा दी है। इसके अलावा रूस से भारत को उर्वरकों की आपूर्ति भी होती है। दोनों देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है, हालांकि व्यापार संतुलन को लेकर भारत की चिंताएं भी बनी हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक 2021 से 2025 के बीच द्विपक्षीय व्यापार में काफी वृद्धि हुई, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा रूस के पक्ष में रहा। ऐसे में भारत व्यापार संतुलन सुधारने और निर्यात बढ़ाने के रास्ते तलाश रहा है।
रक्षा सहयोग अब भी रिश्तों की बड़ी ताकत
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग दशकों पुराना है। भारतीय सैन्य बल बड़ी संख्या में रूसी मूल की रक्षा प्रणालियों और उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। दोनों देशों के बीच मिसाइल, विमान, हेलीकॉप्टर और अन्य सैन्य तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में भी सहयोग रहा है। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत लगातार अपने रक्षा स्रोतों में विविधता ला रहा है, लेकिन रूस अभी भी भारत के प्रमुख रणनीतिक साझेदारों में शामिल है।
अगले महीने भारत आ सकते हैं पुतिन
पीएम मोदी और पुतिन की यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा को लेकर तैयारियां चल रही हैं। दोनों नेताओं के बीच आगामी मुलाकातों के जरिए द्विपक्षीय रिश्तों को और आगे बढ़ाने की उम्मीद है। इसके अलावा पीएम मोदी ने पुतिन को आगामी BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने का निमंत्रण भी दिया है। इससे आने वाले समय में दोनों नेताओं के बीच एक और महत्वपूर्ण बैठक की संभावना बनती है।
SCO मंच पर भारत की संतुलित कूटनीति
बिश्केक में हुई मोदी-पुतिन मुलाकात भारत की संतुलित विदेश नीति को भी दिखाती है। एक तरफ भारत रूस के साथ अपने पुराने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाए हुए है, तो दूसरी ओर यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर शांति और संवाद की वकालत कर रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक शक्तियों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है, भारत रूस, पश्चिमी देशों और अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। मोदी-पुतिन बैठक को इसी व्यापक कूटनीतिक रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।