मुंबई: घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को कमजोर शुरुआत की। वैश्विक बाजारों में दबाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी का असर निवेशकों के सेंटीमेंट पर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 95 अंक और Nifty 21 अंक नीचे कारोबार करते नजर आए।
Sensex और Nifty में गिरावट
शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 95.14 अंक यानी 0.12 फीसदी गिरकर 76,862.13 पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 21.35 अंक यानी 0.09 फीसदी की गिरावट के साथ 24,059.05 पर कारोबार कर रहा था।
7.8% GDP Growth के बावजूद बाजार पर दबाव
शेयर बाजार में कमजोरी ऐसे समय आई है जब भारत की अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी GDP Growth दर्ज की है। उम्मीद से बेहतर आर्थिक वृद्धि को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, वैश्विक बाजारों की कमजोरी और बढ़ती लागत संबंधी चिंताओं ने निवेशकों को सतर्क रखा है।
महंगा Crude Oil बढ़ा रहा चिंता
भारतीय बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी चिंता का कारण बनी हुई है। कारोबार के दौरान Brent Crude करीब 91.15 डॉलर प्रति बैरल और WTI Crude करीब 86.64 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें महंगाई और चालू खाते पर दबाव डाल सकती हैं।
US Bond Yield भी बनी चुनौती
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से भी शेयर बाजार पर दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.77 फीसदी और 30-वर्षीय यील्ड 5.24 फीसदी के ऊंचे स्तर पर रही। ऊंची यील्ड की वजह से निवेशकों के लिए अमेरिकी बॉन्ड जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प आकर्षक हो सकते हैं।
एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख
एशियाई बाजारों में भी मंगलवार को ज्यादातर प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे। हैंग सेंग 1.11 फीसदी, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.71 फीसदी और जापान का निक्केई 225 करीब 0.21 फीसदी नीचे रहा। हालांकि ताइवान वेटेड इंडेक्स में 1.50 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।
आगे बाजार की नजर किन संकेतों पर?
आने वाले कारोबार में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक बाजारों के रुख पर रहेगी। मजबूत GDP आंकड़े घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ते जोखिम और महंगे तेल के कारण शेयर बाजार में फिलहाल उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।