मुंबई: देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की सोमवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई। गंभीर वायरल इंफेक्शन के चलते उन्हें मुंबई के एक अस्पताल के ICU में भर्ती कराया गया। कई दिनों से अन्ना हजारे तेज बुखार, कमजोरी, खांसी और डिहाइड्रेशन जैसी परेशानियों से जूझ रहे थे। जांच के बाद उनकी हालत गंभीर पाए जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत ICU में भर्ती करने का फैसला लिया। हालांकि, फिलहाल उनकी तबीयत पहले की तुलना में बेहतर बताई जा रही है।
दशकों से समाज सेवा में सक्रिय हैं अन्ना हजारे
अन्ना हजारे पिछले कई दशकों से ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाते रहे हैं। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के रालेगण सिद्धि गांव के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। उनके प्रयासों से कभी पानी की समस्या से जूझने वाला गांव विकास की राह पर आगे बढ़ा। गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित अन्ना हजारे सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया और उपवास के जरिए सरकारों पर दबाव बनाया। उनकी सादगी, खादी के कपड़े और गांधी टोपी उनकी पहचान का हिस्सा रहे हैं।
सेना में ड्राइवर के तौर पर की थी नौकरी
15 जून 1938 को महाराष्ट्र के भिंगारी गांव में जन्मे अन्ना हजारे का असली नाम किसन बापट बाबूराव हजारे है। उनके पिता बाबूराव हजारे मजदूरी करते थे, जबकि उनकी मां का नाम लक्ष्मीबाई हजारे था। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण अन्ना की पढ़ाई सातवीं कक्षा के बाद आगे नहीं बढ़ सकी। परिवार के साथ मुंबई आने के बाद उन्होंने एक फूल विक्रेता के यहां काम किया। यहां उन्हें करीब 40 रुपये महीने की तनख्वाह मिलती थी। इसके बाद युवावस्था में उन्होंने सेना में जाने का फैसला किया।
1962 में सेना में हुए शामिल
भारत-चीन युद्ध के बाद युवाओं से सेना में शामिल होने की अपील की गई थी। इसी दौरान अन्ना हजारे ने 1962 में भारतीय सेना जॉइन की और मराठा रेजीमेंट में ड्राइवर के तौर पर भर्ती हुए। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी तैनाती खेमकरण सेक्टर में हुई। युद्ध के दौरान हुए एक पाकिस्तानी हवाई हमले में अन्ना हजारे के कई साथी सैनिक मारे गए, जबकि वह हमले में बच गए। इस घटना का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा।
सेना से रिटायरमेंट के बाद समाज सेवा को बनाया मिशन
अन्ना हजारे ने करीब 15 साल तक देश की सेवा करने के बाद सेना से सेवानिवृत्ति ली। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। रालेगण सिद्धि में जल संरक्षण, ग्राम विकास और सामाजिक सुधार के उनके प्रयासों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों के कारण भी अन्ना हजारे देशभर में चर्चित रहे। अब उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर के बाद उनके समर्थक उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।